यहां दो कमरे में होती है चार सौ बच्चों की पढ़ाई

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बक्सर। यह सुनने में भले अटपटा लग रहा है लेकिन, चौंकाने वाला यह तथ्य सही है। जिले के नावानगर प्रखंड अंतर्गत भैरव संस्कृत प्राथमिक सह मध्य विद्यालय गिरधर बरांव में दो कमरों में चार सौ बच्चों की पढ़ाई होती है। वर्ष 1935 में स्थापित अंग्रेजों के जमाने का यह स्कूल बुरे दौर से गुजर रहा है। हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी विभाग मौन साधे हुए है। असल में, विद्यालय में चार सौ बच्चे नामांकित हैं और उनके पढ़ने के लिए वहां महज दो कमरे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां बच्चे किस परिस्थिति में शिक्षा ग्रहण कर रहे होंगे। दरअसल, भवन के अभाव में यहां बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ना पड़ता है। या यूं कहें कि भवन के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। बावजूद इसके विभाग पूरी तरह अनजान बना हुआ है। बच्चों के अनुपात में भवन नहीं रहने के कारण बच्चे खुले आसमान में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्थापना के बाद से झेल रहा भवन का अभाव जाहिर हो, विद्यालय की स्थापना वर्ष 1935 में हुई थी, जिसके बाद से यह विद्यालय भवन का अभाव झेलता रहा है। शिक्षकों की माने तो विद्यालय में भवन की कमी का मुख्य कारण विद्यालय के नाम में संस्कृत का जुटना है।

संस्कृत के जुटे रहने से विभाग इस पर ध्यान नहीं देता। लिहाजा, बच्चों को विवश होकर किसी तरह पढ़ाई करनी पड़ती है। जागरण में छपी खबर तो सांसद ने दिया फंड दैनिक जागरण में पूर्व में विद्यालय की बदहाली की खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने उस पर संज्ञान लिया और अपने फंड से उन्होंने दो कमरों का निर्माण करवाया। हालांकि, विद्यालय में नामांकित बच्चों के अनुपात में ये कमरे भी कम पड़ रहे हैं।

ऐसी परिस्थिति में बच्चे विभाग का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं। बरसात में होती है सबसे ज्यादा परेशानी विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिवजी पाण्डेय ने बताया कि भवन का अभाव बारिश के दिनों में सबसे अधिक खलता है। गर्मी में तो फिर भी बच्चे बाहर खुले आसमान तले पढ़ लेते हैं लेकिन, बरसात के दिनों में विवश होकर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।

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