पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को विशेष अदालत ने देशद्रोह के मामले में मंगलवार को मौत की सजा सुनाई

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को विशेष अदालत ने देशद्रोह के मामले में मंगलवार को मौत की सजा सुनाई। मीडिया में आ रही खबरों में यह जानकारी दी गई। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने 76 वर्षीय मुशर्रफ को लंबे समय से चल रहे देशद्रोह के मामले में मौत की सजा सुनाई।

कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड परवेज मुशर्रफ का जन्म नई दिल्ली के दरियागंज में 11 अगस्त 1943 को हुआ। मुशर्रफ के दो भाई हैं।
1947 में आजादी के बाद मुशर्रफ का परिवार पाकिस्तान चला गया। उनका परिवार विभाजन से महज एक दिन पहले पाकिस्तान गया।
मुशर्रफ के पिता सैयद मुशर्रफ पाकिस्तानी विदेश सेवा में थे और बतौर विदेश सचिव रिटायर हुए।
मुशर्रफ की मां जरीन ने भी 1947 के भारत-पाक विभाजन के बाद यूनाइटेड नेशन के लिए काम किया।
मुशर्रफ का परिवार 1949 से 1956 तक तुर्की में रहा। मुशर्रफ की प्रारंभिक शिक्षा कराची के सेंट पैट्रिक स्कूल में हुई। उन्होंने लाहौर के कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की।
1961 में मुशर्रफ पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी में शामिल हुए। इसके बाद उनकी काबिलियत को देखते हुए उनका ओहदा सेना में बढ़ता गया।
मुशर्रफ पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस ग्रुप कमांडो बटालियन में बतौर कंपनी कमांडर शामिल हुए।
मुशर्रफ ने 1971 में भारत-पाकिस्तान की वॉर में पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
1998 में मुशर्रफ पाकिस्तान आर्मी के चीफ बने।
तीन जून, 1999 को मुशर्रफ को सेना प्रमुख के पद से हटाए जाने की मांग की गई क्योंकि पाकिस्तान को कारगिल युद्ध के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मशार होना पड़ा था।
1999 में मुशर्रफ ने पाकिस्तान में नवाज शरीफ सरकार का तख्ता पलट कर दिया और पाकिस्तान के राष्ट्रपति बन गए।
2007 में संविधान को निलंबित करने और देश में आपातकाल लगाने के आरोप में देशद्रोह के मामला दर्ज किया गया जो कि एक दंडनीय अपराध है और इस मामले में उनके खिलाफ 2014 में आरोप तय किए गए थे। पूर्व सैन्य प्रमुख मार्च 2016 में इलाज के लिए दुबई गए और सुरक्षा एवं सेहत का हवाला देकर तब से लौटे नहीं।

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