दबंग 3 फिल्म रिव्यू: भरपूर एक्शन, भाई की शर्टलेस सीन, दमदार विलेन- बस और क्या चाहिए !

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निर्देशक- प्रभुदेवा

कलाकार- सलमान खान, सोनाक्षी सिन्हा, सई मांजरेकर, किच्चा सुदीप, अरबाज़ खान

“सुना होगा आपने, अच्छाई और बुराई में जीत अच्छाई की होती है.. गलत सुना है.. जीत बुराई की होती है क्योंकि अच्छे आदमी में इस लेवल का कमीनापन होता ही नहीं है..”

बाली और चुलबुल पांडे के बीच इस तरह से संवाद फिल्म को ‘दबंग’ बनाते हैं। दोनों अभिनेता किसी ज्वालामुखी की तरह दिखे हैं, ताकतवर। इस जोड़ी का भरपूर इस्तेमाल किया जा सकता था। लेकिन, नहीं किया गया है। खैर, जैसा नाम वैसी ही फिल्म, पूरी दंबगई से भरी हुई। पहली सीन से आखिरी सीन तक। प्रभुदेवा के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक मसाला इंटरटेनर है, जो पूर्णतः सलमान फैंस के लिए ही बनाई गई है।

दबंग 3 रिव्यू
फिल्म की कहानी

कहानी शुरु होती है एक शादी से। जहां लूटेरों ने धावा बोल दिया है और सभी मेहमानों को लूटकर भाग रहे हैं। इतने में एंट्री होती है चुलबुल पांडे (सलमान खान) की, जो गुंडों से एक लंबी लड़ाई लड़कर सारे गहने छुड़वाता है और कुछ पैसों को समाज कार्य में लगवाता है। वह ‘पुलिस वाला गुंडा’ है, लेकिन दिलदार है। पत्नी रज्जो (सोनाक्षी), एक बेटे, भाई मक्खी (अरबाज खान) और पिता (प्रमोद खन्ना) के साथ इंस्पेकटर चुलबुल पांडे दंबगई की ज़िंदगी गुज़ार ही रहा होता है, जब एक केस को सुलझाते सुलझाते उसका सामना लड़कियों की तस्करी करने वाले खूंखार माफिया सरदार बाली (किच्चा सुदीप) से होता है। बाली के साथ ही चुलबुल पांडे की आंखों के सामने उसका अतीत कौंध जाता है। वो अतीत, जहां खुशी (सई मांजरेकर) है, चुलबुल की जिंदगी में बेइंतहा प्यार है। लेकिन यह प्यार ज्यादा देर तक नहीं टिक पाता क्योंकि बाली की बुरी नजर खुशी पर है और वो चुलबुल की जिंदगी पूरी तरह से तबाह कर जाता है। बाली वो नाम है, जिसकी वजह से चुलबुल पांडे दबंग इंस्पेटकर चुलबुल पांडे बन जाता है। अब एक बार फिर दोनों आमने सामने आए हैं। लेकिन इस बार चुलबुल के इरादे ज्यादा मजबूत हैं। वह ना सिर्फ अपनी परिवार की रक्षा करता है, बल्कि देश के प्रति अपने फर्ज़ को निभाने की भी कसम खाता है। अब चुलबुल पांडे बाली से बदला कैसे लेगा और क्या बाली से एक बार फिर अपने परिवार को बचा पाएगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

दबंग 3 रिव्यू
अभिनय

कोई शक नहीं कि रॉबिनहुड चुलबुल पांडे के किरदार में सलमान खान दमदार हैं। एक्शन, रोमांस हो या ज़ज्बाती सीन, सलमान प्रभावी दिखे हैं। उनका एक अलग ही स्वैग है, जो दबंग के चुलबुल पांडे पर फिट बैठता है। वहीं, बॉलीवुड मसाला फिल्मों में विलेन का दमदार होना भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में किच्चा सुदीप फिल्म के लिए परफेक्ट चुनाव हैं। फिल्म में हर वो दृश्य उभरकर आया है, जहां सलमान और सुदीप आमने सामने हैं। लेकिन अफसोस वैसे दृश्य ही बहुत कम हैं। सोनाक्षी सिन्हा और सईं मांजरेकर स्क्रीन पर खूबसूरत दिखी हैं। लेकिन दबंग फ्रैंचाइजी की बाकी फिल्मों की तरह यहां भी बतौर हीरोइन उन्हें जगह काफी कम मिली है। अरबाज खान ने अपने किरदार मक्खनचंद पांडे के साथ न्याय किया है, जबकि सह कलाकरों में शायद ही कोई चेहरा आपको याद रहे।

 

दबंग 3 रिव्यू
निर्देशन

बतौर निर्देशक प्रभुदेवा की अपनी एक स्टाइल है और वो दबंग 3 में भी साफ साफ झलकती है। उन्होंने फिल्म में हर वो तड़का डाला है, जो सलमान खान के फैंस देखना पसंद करते हैं- भरपूर एक्शन, थोड़ा रोमांस, थोड़ी चुहलबाजी, धमाकेदार सीटीमार डायलॉग्स और भाई की शर्टलेस सीन। और इसी फेर में फिल्म बन गई 2 घंटे 42 मिनट की। कहानी का ताना बाना इतना कमजोर बुना गया है कि पहले हॉफ से ही फिल्म थकाने लग जाती है। एक्शन से भरपूर कुछ दृश्य अच्छे लगे हैं, लेकिन चुलबुल पांडे और उनके सिपाहियों के बीच के मजेदार संवाद काफी कम डाले हैं। लिहाजा, चुलबुल पांडे का चुलबुलापन खलेगा।

 

दबंग 3 रिव्यू
तकनीकि पक्ष

हीरो- विलेन की आपसी रंजिश के अलावा फिल्म में दहेज, पानी संरक्षण, बाल तस्करी, रेप जैसे मुद्दों पर भी हल्की फुल्की बात की गई है। गौरतलब है कि फिल्म की कहानी लिखी है सलमान खान ने और पटकथा में उनका हाथ बंटाया है प्रभुदेवा और अलोक उपाध्याय ने। रितेश सोनी द्वारा एडिटिंग की गई है, जो कि फिल्म की सबसे कमज़ोर कड़ी है। फिल्म को आराम से 20-25 मिनट छांटा जा सकता था, जिससे कहानी थोड़ी मजबूत और बंधी हुई लग सकती थी। महेश लिमाए की सिनेमेटोग्राफी औसत है।

 

दबंग 3 रिव्यू
संगीत

फिल्म में संगीत दिया है साजिद- वाजिद ने। जिन्हें नहीं पता, बता दें कि दबंग और दबंग 2 में भी साजिद- वाजिद ने ही संगीत दिया था, जो कि काफी चर्चित रहा था। दोनों फिल्मों के गाने चार्टबस्टर रहे थे। लेकिन इस श्रेणी में दबंग 3 थोड़ा निराश करती है। फिल्म का एक भी गाना प्रभावित नहीं करता और फिल्म की लंबाई को बढ़ाने का दोषी भी लगता है। सभी गाने जबरदस्ती कहीं भी, कभी भी ठूंसे गए हैं।

 

दबंग 3 रिव्यू
देंखे या ना देंखे

फिल्म लंबी होने की वजह से कहीं कहीं सब्र का इम्तिहान लेती है। लेकिन यदि दबंग फ्रैंचाइजी और चुलबुल पांडे के फैन रहे हैं तो दबंग 3 भी आपको निराश नहीं करेगी। फिल्मीबीट की ओर से दबंग 3 को 3 स्टार।

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