बंद समर्थकों ने जाम किया एनएच, नारेबाजी

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पश्चिम चंपारण। केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ बुधवार को भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा, भाकपा माले समेत विभिन्न श्रमिक संगठनों ने भारत बंदी के समर्थन में पैदल मार्च किया। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने दुकानें भी बंद कराई। दोपहर में अनुमंडल कार्यालय के समीप जुटे माले व कांग्रेस कार्यकर्ता एनएच पर बैठ गए तथा अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरुद्ध आक्रोश प्रकट किया। एनएच जाम होने के कारण करीब 20 मिनट तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।

विरोध प्रदर्शन में शामिल भिखारी प्रसाद, परशुराम यादव, लालबाबू प्रसाद सोनी, राजेंद्र प्रसाद, ताजुद्दीन मंसूरी, रामअवध राय, विदा राम, रमेश चौधरी, प्रेम मांझी, विदा, सुभावती देवी, सरल राय, पारस महतो, तेतरी देवी, कांग्रेस के रमाशंकर दूबे, राजेंद्र प्रसाद, हरेंद्रनाथ पांडेय आदि ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न सेक्टरों में निजीकरण को बढ़ावा दे रही। विभाजनकारी सीएए, एनआरपी, एनपीआर को देश में लागू करने पर अमादा है। जेएनयू में छात्रों पर हमले कराए जा रहे। सरकार की दोहरी नीतियों के कारण देश के श्रमिक और खेतीहर मारे मारे फिर रहे। विरोध प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने मांग रखी कि सरकार अविलंब संसद में भूमि संरक्षण कानून लाए।

इसके साथ किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करते हुए फसल की लागत का डेढ़गुना मूल्य दिया जाए। मंदी, छंटनी और महंगाई पर रोक लगाते हुए सरकार पक्का काम और समान दाम की गारंटी दे। खेग्रामस ने दैनिक मजदूरी 600 रुपये करने, मनरेगा मजदूरों को 200 दिन काम और 277 रुपये मजदूरी देने, आशा, रसोइया समेत अन्य कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी देने, रसोई गैस की कीमतें कम करने, कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली देने, दलितों-गरीबों को वासगीत भूमि का पर्चा देने आदि मांगें भी सरकार के समक्ष रखी।

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