पटना, बिहार | Asian Times | राजनीतिक रिपोर्ट
बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के भीतर चल रहा विवाद अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। राणा रंजीत सिंह से जुड़े कथित ऑडियो और सोशल मीडिया पर जारी बयानबाजी के बाद पार्टी के नेताओं की सफाई चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने राणा रंजीत सिंह और आदिल हसन आज़ाद के मामले में अलग-अलग संगठनात्मक फैसलों की जानकारी दी है।
ऑडियो वायरल होने के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
राणा रंजीत सिंह से जुड़े कथित ऑडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पार्टी के भीतर चल रहे विवाद पर लोगों की नजरें टिक गई हैं। सोशल मीडिया पर पार्टी से जुड़े लोगों की सफाई और प्रतिक्रियाओं को लेकर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, वायरल ऑडियो में क्या कहा गया है, बातचीत किस संदर्भ में हुई और क्या उसे पूरा साझा किया गया है—इन बातों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। किसी रिकॉर्डिंग के वायरल होने मात्र से उसमें लगाए गए आरोप साबित नहीं हो जाते।
अख्तरुल ईमान का ‘आदम और इब्लीस’ वाला बयान क्यों चर्चा में है?
आपके बताए अनुसार, अख्तरुल ईमान के एक बयान में आदम और इब्लीस की गलती का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जब उनसे गलती हो सकती है, तो हम और आप भी गलती कर सकते हैं।
इस बयान का पूरा वीडियो और उसका संदर्भ देखना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने यह बात किस मुद्दे पर और किसके जवाब में कही थी। बिना पूरी रिकॉर्डिंग देखे इसे राणा रंजीत सिंह के विवाद से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।
आदिल हसन आज़ाद ने क्या कहा?
आदिल हसन आज़ाद AIMIM के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। अक्टूबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, राणा रंजीत सिंह के साथ उनकी सार्वजनिक बयानबाजी हुई थी। राणा ने पार्टी की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाए और आदिल को चुनौती देते हुए पार्टी के नाम पर कथित उगाही से जुड़े सबूत सामने लाने की बात कही थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अख्तरुल ईमान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, आदिल हसन आज़ाद का स्पष्टीकरण संतोषजनक माना गया और उनके मामले को समाप्त कर दिया गया। दूसरी ओर, राणा रंजीत सिंह को अगले आदेश तक निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई। ।
क्या राणा रंजीत सिंह पहले से पार्टी को एक्सपोज करने की योजना बना रहे थे?
यह सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकता है, लेकिन अभी इसे साबित तथ्य नहीं कहा जा सकता। इसके लिए यह देखना होगा कि रिकॉर्डिंग कब बनाई गई, उसमें किन लोगों की बातचीत है और क्या राणा रंजीत सिंह ने पहले से किसी योजना के तहत इसे सार्वजनिक करने की बात कही थी।
एक दूसरा सवाल यह भी है कि पार्टी के भीतर उठाए गए सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से देने के बजाय संगठनात्मक प्रक्रिया के माध्यम से क्यों नहीं दिया गया। इसका उत्तर पार्टी नेतृत्व और संबंधित नेताओं के आधिकारिक बयानों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
AIMIM में हिंदू नेताओं की भूमिका पर बहस
राणा रंजीत सिंह की राजनीतिक भूमिका के कारण यह विवाद AIMIM में गैर-मुस्लिम नेताओं की भागीदारी पर भी सवाल खड़े करता है। लेकिन किसी पार्टी में हिंदू नेता का शामिल होना अपने आप में गलत या विरोधाभासी नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि पार्टी अपने नेताओं को कितनी राजनीतिक स्वतंत्रता देती है और संगठन के भीतर असहमति को कैसे संभालती है।
राणा रंजीत सिंह से जुड़े ऑडियो, आदिल हसन आज़ाद की सफाई और अख्तरुल ईमान के संगठनात्मक फैसले ने AIMIM के इस विवाद को नया आयाम दिया है। अब महत्वपूर्ण सवाल हैं—वायरल रिकॉर्डिंग में वास्तव में क्या कहा गया, दोनों पक्षों के दावों में क्या तथ्य हैं और पार्टी ने अलग-अलग नेताओं के स्पष्टीकरण पर अलग फैसले क्यों लिए?
इस पूरे मामले की निष्पक्ष तस्वीर सामने लाने के लिए वायरल वीडियो, मूल बयान और पार्टी के आधिकारिक वक्तव्यों की पुष्टि जरूरी है।
कौन हैं मोहम्मद आदिल हसन?
मोहम्मद आदिल हसन AIMIM के नेता हैं। उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कटिहार जिले की बलरामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 80,070 वोट मिले।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार संगीता देवी को 80,459 वोट मिले और उन्होंने 389 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। सीपीआई (एमएल) के महबूब आलम 79,141 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस तरह बलरामपुर में मुकाबला बेहद करीबी रहा और आदिल हसन को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट: Asian Times
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)





