दिल्ली-NCR से सामने आए एक वायरल वीडियो ने ऑनलाइन कैब-बाइक सर्विस और गिग वर्कर्स की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। वायरल पोस्ट के मुताबिक, एंबियंस मॉल के पास एक महिला यात्री और रैपिडो राइडर के बीच करीब ₹186 के किराये को लेकर विवाद हुआ। यात्री की ओर से कथित तौर पर सर्वर/पेमेंट समस्या का हवाला दिया गया, जबकि राइडर भुगतान को लेकर अपनी बात पर कायम रहा।
इस तरह की घटनाओं में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ऐप पर किराया तय होता है और पूरी सेवा रैपिडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुक होती है, तो भुगतान संबंधी विवाद का समाधान मौके पर ग्राहक और राइडर के बीच बहस से क्यों हो?
अगर ग्राहक कहता है कि पेमेंट तकनीकी कारण से नहीं हुआ, तो कंपनी को राइड की डिजिटल हिस्ट्री, पेमेंट स्टेटस और राइडर के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। वहीं, अगर कंपनी के रिकॉर्ड में भुगतान नहीं हुआ है, तो ग्राहक से भुगतान लेने की प्रक्रिया भी स्पष्ट और सम्मानजनक होनी चाहिए।
इसी तरह अगर कोई ग्राहक जानबूझकर किराया नहीं देता, तो कंपनी के पास उसकी शिकायत दर्ज करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने का स्पष्ट सिस्टम होना चाहिए। राइडर को मौके पर बहस, दबाव या बदतमीजी करने की स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
दूसरी तरफ, राइडर भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर सेवा दे रहा है। इसलिए यदि तकनीकी समस्या, गलत पेमेंट स्टेटस या ऐप की गड़बड़ी के कारण उसे भुगतान नहीं मिला है, तो कंपनी को पहले राइडर का भुगतान सुरक्षित करना चाहिए और बाद में ग्राहक से विवाद का समाधान करना चाहिए।
हाल के महीनों में रैपिडो से जुड़े अन्य मामलों में भी ग्राहक सुरक्षा और किराये को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। सितंबर 2026 में नोएडा में एक महिला ने रैपिडो डिलीवरी राइडर पर आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप लगाया था, जिसके बाद कंपनी की ओर से माफी की बात सामने आई।
सवाल रैपिडो से
क्या रैपिडो ऐसी घटनाओं के लिए एक स्पष्ट “Payment Dispute Protocol” बनाएगा?
ग्राहक और राइडर के बीच सीधे विवाद की स्थिति में कंपनी तुरंत हस्तक्षेप करे।
तकनीकी समस्या होने पर राइडर का भुगतान कंपनी सुरक्षित करे।
जानबूझकर भुगतान न करने की पुष्टि होने पर ग्राहक की आईडी पर नियमों के अनुसार कार्रवाई हो।
गलत तरीके से अतिरिक्त पैसा मांगने वाले राइडर पर भी कार्रवाई हो।
ग्राहक या राइडर के साथ किसी भी तरह की बदतमीजी की शिकायत की स्वतंत्र जांच हो।
विवाद होने पर दोनों पक्षों को अपनी बात और वीडियो/पेमेंट रिकॉर्ड अपलोड करने का विकल्प मिले।
₹186 छोटा या बड़ा मुद्दा नहीं है—मुद्दा यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सेवा देने वाले व्यक्ति और सेवा लेने वाले ग्राहक, दोनों के साथ पारदर्शी और सम्मानजनक व्यवस्था होनी चाहिए।
Asian Times की अपील: वायरल वीडियो देखकर किसी एक पक्ष को दोषी मानने से पहले रैपिडो और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






