कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) का घोषणापत्र जारी कर ‘दीदी के 10 संकल्प’ को चुनावी केंद्र में ला दिया है। इन वादों के जरिए पार्टी ने एक बार फिर कल्याणकारी योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और रोजगार पर जोर देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधी चुनौती दी है।
घोषणापत्र में सबसे बड़ा फोकस गरीब, किसान और महिलाओं पर है। ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के विस्तार, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
●2021 बनाम 2026: क्या बदला?
2021 में TMC ने “मां, माटी, मानुष” के नारे और मजबूत वेलफेयर मॉडल के दम पर जीत दर्ज की थी। इस बार भी पार्टी उसी मॉडल को आगे बढ़ा रही है, लेकिन कुछ अहम बदलाव दिख रहे हैं—
•वेलफेयर का विस्तार: पुरानी योजनाओं को और ज्यादा लाभकारी बनाने पर जोर
•महिला वोट बैंक पर फोकस: नकद सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
•युवा और रोजगार: स्किल और जॉब क्रिएशन पर अधिक स्पष्ट रोडमैप
•स्थानीय असंतोष कम करने की कोशिश: उम्मीदवारों में बड़े पैमाने पर बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, TMC इस बार “डिलीवरी + भरोसा” मॉडल पर चुनाव लड़ रही है, जबकि BJP “नए वादों + शासन बदलाव” के एजेंडे के साथ मैदान में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC की सबसे बड़ी ताकत उसका स्थापित वेलफेयर नेटवर्क और महिला वोटर आधार है। वहीं, BJP रोजगार, वेतन आयोग और बड़े आर्थिक वादों के जरिए इस बढ़त को चुनौती दे रही है।
ऐसे में 2026 का चुनाव केवल वादों की लड़ाई नहीं, बल्कि “विश्वास बनाम विकल्प” की जंग बन चुका है—जहां ‘दीदी के 10 संकल्प’ की असली परीक्षा मतपेटी में होगी।
@MUSKAN KUMARI






