अवैध वसूली गिरोह से जुड़े आरोपी का बैंक खाता रिलीज करने और कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में घिरे पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार सुधांशु को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ पूर्व में लिए गए फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी पांच वेतन वृद्धि पर रोक के आदेश को यथावत रखा है।
यह मामला भागलपुर के कहलगांव क्षेत्र का है, जहां तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) रहे मनोज कुमार सुधांशु (वर्तमान में डीएसपी, यातायात, भोजपुर) पर गंभीर आरोप लगे थे। आरोप था कि उन्होंने झारखंड सीमा पर ओवरलोड ट्रकों से अवैध वसूली करने वाले गिरोह के सदस्य लालू मंडल के फ्रीज किए गए बैंक खातों को बिना वरीय अधिकारियों की अनुमति के रिलीज करा दिया। इन खातों में 50 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा थी।
गृह विभाग की जांच में यह पाया गया कि सुधांशु ने न केवल बैंक खातों को रिलीज कराने में अनियमितता बरती, बल्कि उनके कार्यकाल के दौरान 61 विशेष प्रतिवेदित कांड लंबित भी पाए गए। विभागीय कार्रवाई के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया और बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति से उन पर कड़ा दंड लगाया गया।
इस दंड के खिलाफ सुधांशु ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। 13 जनवरी 2026 को आए फैसले में अदालत ने पांच वेतन वृद्धि पर रोक के दंड को सही ठहराया और उसे बरकरार रखा। हालांकि, कोर्ट ने पदोन्नति पर पांच वर्षों की रोक को निरस्त कर दिया।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने नया संकल्प जारी करते हुए प्रमोशन रोक को समाप्त कर दिया है, जबकि वेतन वृद्धि रोकने का दंड जारी रहेगा।
इस कार्रवाई को सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार और कर्तव्यहीनता के प्रति किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
@MUSKAN KUMARI






