‘अनरिलायड’ दस्तावेज देने से इनकार, अदालत बोली—मुकदमे को लंबा करने की कोशिश
लैंड फॉर जॉब मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की विशेष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने और मुकदमे में देरी करने की कोशिश हैं। अदालत ने 1,600 से अधिक दस्तावेज एक साथ उपलब्ध कराने की मांग को “उलटी गंगा बहाने” जैसा करार दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘अनरिलायड’ दस्तावेज वे होते हैं, जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन आरोप पत्र में उनके आधार पर आरोप नहीं लगाए जाते। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों को पहले ही इन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है, इसलिए इन्हें अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लालू यादव के पूर्व निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं, जिन्होंने इसी तरह की मांग रखी थी।
मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, आरोप है कि रेलवे में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई और ये संपत्तियां उनके परिवार या करीबी लोगों के नाम पर दर्ज कराई गईं। इस मामले में 18 मई 2022 को केस दर्ज किया गया था, जिसमें राबड़ी देवी समेत कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
अपने 35 पन्नों के आदेश में अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी जिरह की आड़ में न्यायिक प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में नहीं ले सकते। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निष्पक्ष सुनवाई के साथ-साथ मुकदमे का समय पर निष्पादन भी जरूरी है और किसी भी पक्ष को प्रक्रिया को लंबा खींचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
@MUSKAN KUMARI







