चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग पर ट्रेड यूनियनों का आह्वान, कई राज्यों में असर, कोलकाता में सामान्य स्थिति
कोलकाता/नई दिल्ली:
चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर 14 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को देशव्यापी बंद का आयोजन किया गया। हालांकि इस बंद का पश्चिम बंगाल में खास असर नहीं दिखा और राज्य में जनजीवन सामान्य बना रहा।
राजधानी कोलकाता समेत राज्य के अन्य जिलों में सरकारी और निजी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहे। स्कूल-कॉलेज भी नियमित रूप से संचालित हुए और परिवहन सेवाएं भी सुचारु रहीं। एक समय वाम दलों का मजबूत गढ़ रहा पश्चिम बंगाल इस बार बंद के प्रभाव से लगभग अछूता नजर आया।
हालांकि सीपीआईएम की छात्र शाखा एसएफआई ने जादवपुर यूनिवर्सिटी और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के गेट पर बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि चार नई श्रम संहिताएं और अन्य नीतियां कामगारों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं। कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने भी बंद का समर्थन किया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने दावा किया कि करीब 30 करोड़ कर्मचारी इस बंद के समर्थन में हैं।
उनके अनुसार असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, ओडिशा और बिहार समेत कई राज्यों में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। खासकर केरल में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।
ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की नीतियों को कामगार और किसान विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग दोहराई है।
@MUSKAN KUMARI





