(एशियन टाइम्स )

अजमेर में PWD कैंपस बना शराब-नॉनवेज पार्टी का अड्डा
सरकारी दफ्तर परिसर में जाम छलकाने का वीडियो वायरल, विभाग में मचा हड़कंप
अजमेर। Rajasthan
राजस्थान के अजमेर जिले से सरकारी तंत्र की साख पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के सिविल लाइंस स्थित कार्यालय परिसर में शराब और नॉनवेज पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना शुक्रवार देर रात की है, जबकि वीडियो शनिवार को सामने आया।
वायरल हुए तीन अलग-अलग वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ युवक PWD कार्यालय परिसर के भीतर खुलेआम शराब पीते और नॉनवेज खाते नजर आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में पार्टी में शामिल लोग विभागीय अधिकारियों की गाड़ियों के ड्राइवर बताए जा रहे हैं।
बाइक सवार युवकों ने बनाया वीडियो
सूत्रों के अनुसार, शराब पार्टी के दौरान ही दो बाइक सवार युवक वहां पहुंचे और पूरी घटना का वीडियो बना लिया। वीडियो बनाने वाला युवक अपने परिचित चालक से बातचीत के लिए अंदर गया था, लेकिन वहां मौजूद अन्य चालकों ने उसके आने पर सवाल-जवाब शुरू कर दिए। इसके बावजूद युवक वीडियो रिकॉर्ड कर वहां से निकल गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सरकारी बैनर की आड़ में चलती रही पार्टी
प्रारंभिक पड़ताल में यह भी सामने आया है कि यह पूरी शराब पार्टी PWD की पार्किंग एरिया में आयोजित की गई थी, जहां राज्य और केंद्र सरकार के प्रचार बैनर लगे हुए थे। उन्हीं बैनरों की आड़ लेकर शराब और नॉनवेज पार्टी की जा रही थी, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
सरकारी नियमों की खुली अवहेलना
सरकारी कार्यालय परिसर में किसी भी तरह की शराब, नशा या अनैतिक गतिविधि स्पष्ट रूप से निषिद्ध है। ऐसे कृत्य राज्य सेवा नियमों और सरकारी संपत्ति उपयोग नियमों का गंभीर उल्लंघन माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी परिसरों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।
विभाग में मचा हड़कंप, जांच के आदेश
वीडियो सामने आने के बाद PWD विभाग में खलबली मच गई है। विभागीय अधिकारियों ने माना है कि वायरल वीडियो उन्हीं के कार्यालय परिसर का प्रतीत हो रहा है।
PWD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“वायरल वीडियो हमारे कैंपस का ही लग रहा है। मामले की सोमवार को जांच करवाई जाएगी। यदि वीडियो सही पाया गया तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
बड़े सवाल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या सरकारी दफ्तर रात के समय असामाजिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनते जा रहे हैं?
क्या अधिकारियों की निगरानी प्रणाली पूरी तरह फेल हो चुकी है?
यदि ड्राइवर सरकारी परिसर में इस तरह की गतिविधियां कर रहे हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अजमेर का यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी अनुशासन, जवाबदेही और कार्य संस्कृति पर गहरा सवाल है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच के बाद वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में दबा दिया जाता है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







