पटना/बेंगलुरु। बिहार पुलिस की Special Task Force (STF) ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए बिहार के नौबतपुर/दानपुर इलाके के कुख्यात अपराधी मनोज सिंह और उसके बेटे मानिक सिंह को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी तीन राज्यों में फैले संगठित अपराध के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
दोनों आरोपी कौन हैं?
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मनोज सिंह और उसका बेटा मानिक सिंह बिहार के पटना (नौबतपुर/दानपुर) के रहने वाले हैं।
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यह पिता-पुत्र जोड़ी वर्षों से कानून को लेकर फरार थी और संगठित अपराध की दुनिया में गहरा नेटवर्क चला रही थी।
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उन पर कई हत्या, रंगदारी, अपहरण, डकैती, आतंकी गतिविधियों और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।
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दोनों के खिलाफ करीब 40 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।
विशेष रूप से पुलिस रिकॉर्ड में यह भी बताया गया है कि इन दोनों पर कम से कम 24 हत्या के मामलों का आरोप था, जिसमें प्रत्यक्ष हत्या सहित संगठित गिरोह के सदस्य के तौर पर अपराध किये जाने का आरोप शामिल था।
इन दोनों को स्थानीय जनता में कभी-कभी “बाप-बेटा गैंग” कहा जाता था क्योंकि दोनों मिलकर अपराध की दुनिया में सक्रिय थे और प्रतिरोध करने वालों पर भी हिंसा करने की प्रवृत्ति रखते थे।
गिरफ्तारी तक का लंबा सफर
बिहार पुलिस ने इन आरोपियों को पिछले कई वर्षों से तलाशा था। आरोप है कि दोनों पहले 2015 में गिरफ्तार किये गए थे, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई और उन्होंने फिर से अपराध की दुनिया में वापसी कर ली। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इनके खिलाफ इनाम राशि भी घोषित की थी — मनोज पर लगभग ₹3 लाख और बेटे मानिक पर ₹1 लाख इनाम।
बिहार की एसटीएफ ने लंबे समय तक इनके ठिकानों की जांच की, गुप्त सूत्रों से जानकारी जुटाई और मोबाइल सर्विलांस के जरिए उन्हें ट्रैक किया। आए दिन पुलिस को जानकारी मिलती रहती थी कि दोनों कहीं न कहीं छिपकर रह रहे हैं और बिहार से दूर भीड़-भाड़ वाले शहर बेंगलुरु तक पहुँच गये हैं।
आखिरकार पुलिस को कोडिगेहल्ली पुलिस स्टेशन के इलाके में दोनों के छिपे होने की सटीक जानकारी मिली। इसके बाद एक सुनियोजित विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें स्थानीय पुलिस और बिहार STF ने संयुक्त तरीके से कार्रवाई की। इस छापेमारी के दौरान दोनों को कोई मुठभेड़ या संघर्ष किये बिना गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोप और संगीन मुकदमे
पुलिस के अनुसार यह दोनों पिता-पुत्र सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी गिरोह का नेटवर्क चला रहे थे। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों में शामिल हैं:
हत्या (Murder) — दर्जनों मामलों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संलिप्तता।
रंगदारी और डकैती — व्यापारियों और आम नागरिकों से जबरन वसूली।
अपहरण और धमकी — विरोध करने वालों को अगवा करने और खौफ पैदा करने का आरोप।
आर्म्स एक्ट उल्लंघन — अवैध हथियार रखने और संचालित करने का आरोप।
संगठित अपराध — गिरोह संचालन जो कई व्यक्तियों और क्षेत्रों में सक्रिय था।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक बिहार पुलिस ने ही यह बताया कि इन दोनों पिता-पुत्र को पकड़ने के लिए सहायता करने की जानकारी देने वाले लोगों को भी इनाम का हिस्सा प्राप्त करने का प्रावधान था। लेकिन इन दोनों को पकड़ने के लिए कई वर्षों तक प्रयास होते रहे।
गिरफ्तारी के बाद की स्थिति
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमंथ कुमार सिंह ने बताया कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह से वैधानिक तरीके से की गई और दोनों आरोपियों को जल्द ही बिहार पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। दोनों के पास से पुलिस ने नकद ₹11,290, एक सोने की चेन, कई मोबाइल फोन, डोंगल और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जो यह संकेत देता है कि दोनों एक लंबी अवधि से वहां सक्रिय थे।
गिरफ्तारी के बाद STF द्वारा इन दोनों को ट्रांज़िट वारंट के तहत बिहार वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद उन्हें पटना की अदालत में पेश किया जाएगा और पुराने मामलों का विस्तृत तरीके से निपटारा किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान इन दोनों से अपने सहयोगियों, हथियारों की सप्लाई और गिरोह नेटवर्क की जानकारी लेने का प्रयास जारी है, जिससे कई पुराने अनसुलझे मामलों का भी खुलासा होने की संभावना है।
स्थानीय और राजकीय प्रतिक्रिया
इस गिरफ्तारी के बाद बिहार में खासकर विधान सभा में भी कानून-व्यवस्था पर बहस हुई। विपक्षी दलों ने कहा कि राज्य में अपराधियों पर पहले नियंत्रण नहीं था, और यही वजह रही कि ऐसे खतरनाक अपराधी इतने समय तक फरार रहे। वहीं राज्य सरकार और पुलिस ने इसे संगठित अपराध पर बड़ी कामयाबी बताया है, जो यह संकेत देता है कि राज्य अब अपराध को रोकने के लिए गंभीर कदम उठा रहा है।
नागरिकों में भी इस गिरफ्तारी को लेकर प्रतिक्रिया मिली है — कई लोगों ने कहा कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में अपराधियों का छिपकर रहना यह दिखाता है कि वे लंबे समय से कानून को चुनौती दे रहे थे। इनकी गिरफ्तारी से स्थानीय जनता को सुरक्षा-भावना में वृद्धि मिली है, खासकर उन इलाकों में जहाँ इन दोनों का आतंक सबसे अधिक था।
क्राइम नेटवर्क का प्रभाव और आगे की जांच
पुलिस का मानना है कि इन दोनों की गिरफ्तारी से राज्य में लंबे समय से सक्रिय एक बड़े संगठित अपराध नेटवर्क को धक्का लगा है। इससे न केवल पटना के आसपास के जिलों में, बल्कि गाँवों और शहरों में फैले अपराधियों को यह संदेश गया है कि कानून किसी से भी पीछे नहीं हटेगा।
STF अब आगे की जांच में निम्न बिंदुओं पर काम कर रही है:
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दोनों आरोपी कितने समय से बेंगलुरु में सक्रिय थे?
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क्या किसी ने उन्हें सुरक्षा या आश्रय प्रदान किया?
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बेंगलुरु से भी क्या उन्होंने कोई आपराधिक गतिविधि अंजाम दिया?
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इनके गिरोह में शामिल अन्य नाम और सहयोगी कौन-कौन हैं?
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हथियारों और धन संचरण का तरीका क्या था?
इन जानकारियों से न केवल बिहार, बल्कि तीनों राज्यों (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल) में संगठित अपराध का गहरा मानचित्र उभर सकता है, जिससे भविष्य में और भी बड़े अपराधियों पर छापेमारी संभव हो सकेगी।
बिहार STF की यह कार्रवाई न केवल बिहार के संगठित अपराध पर एक निर्णायक प्रहार है, बल्कि यह यह भी संदेश देती है कि आज भी कानून अपने दायरे में अपराधियों को लाने की पूरी क्षमता रखता है। पिता-पुत्र की जोड़ी को बेंगलुरु से पकड़ना न सिर्फ पुलिस की रणनीति और समन्वय की सफल कहानी है, बल्कि इससे यह भी साबित होता है कि अपराध कहीं भी हो, राज्यों की सीमा अपराधियों को बचा नहीं सकती।
🔎 Asian Times — Crime Desk, Patna/Bengaluru
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







