पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक और सैन्य हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में इस अप्रकाशित पुस्तक के कथित अंशों का हवाला दिए जाने से विवाद और तेज हो गया है।
जनरल नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। सेवानिवृत्ति के बाद लिखी गई उनकी इस पुस्तक में 2020 के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन गतिरोध और अग्निपथ योजना जैसे संवेदनशील विषयों के उल्लेख की बात सामने आई है। यह पुस्तक जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने समीक्षा पूरी होने तक इसके प्रकाशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया। मंत्रालय से अब तक अंतिम ‘क्लीयरेंस’ नहीं मिलने के कारण पुस्तक का भविष्य अधर में है।
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों पर लागू नियम
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, विशेषकर संवेदनशील पदों पर रहे अधिकारियों, पर सेवानिवृत्ति के बाद भी कड़े नियम लागू रहते हैं।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA): राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है।
प्रकाशन से पूर्व अनुमति: गोपनीय या संवेदनशील विषयों पर लिखी किसी भी पुस्तक या लेख के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
कूलिंग-ऑफ पीरियड: सेवानिवृत्ति के बाद निजी या व्यावसायिक नियुक्ति से पहले एक वर्ष का समय तय है।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सरकार OSA के तहत मुकदमा चला सकती है और CCS (पेंशन) नियमों के अनुसार पेंशन पर भी कार्रवाई संभव है।
LAC और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुस्तक में 2020 के LAC गतिरोध से जुड़ी रणनीतिक जानकारियां सार्वजनिक होती हैं, तो इससे चीन के साथ संवेदनशील स्थिति प्रभावित हो सकती है। गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद जनरल नरवणे के नेतृत्व में ही सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। वर्तमान में LAC पर स्थिति अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन भारी तैनाती बनी हुई है।
राहुल गांधी के आरोप और सरकार का जवाब
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुस्तक के मसौदे के कथित अंशों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुस्तक की सच्चाइयों से डर रही है। भाजपा और रक्षा मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष “काल्पनिक बातें” फैलाकर सेना पर सवाल उठा रहा है और सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
सरकार का स्पष्ट रुख है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी संवेदनशील विवरण का खुलासा स्वीकार्य नहीं है, इसी कारण पुस्तक को अब तक हरी झंडी नहीं दी गई है।
@MUSKAN KUMARI







