छपरा के सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड से एक मार्मिक और सोचने पर मजबूर कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मां के निधन के बाद न रिश्तेदार पहुंचे और न ही गांव के लोग आगे आए। मजबूरी में दो बेटियों ने ही मां की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अपना फर्ज निभाया। यह दृश्य न सिर्फ भावुक करने वाला था, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर कर रहा था।
मां के निधन के बाद शव कई घंटों तक घर के दरवाजे पर पड़ा रहा। बेटियां गांव की गलियों में हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगाती रहीं, लेकिन कोई आगे नहीं आया। काफी देर बाद दो-तीन लोग पहुंचे, तब जाकर किसी तरह अंतिम संस्कार हो सका। परंपराओं और सामाजिक रूढ़ियों के बीच फंसी इन बेटियों ने हिम्मत और साहस के साथ वह जिम्मेदारी निभाई, जिसे समाज आज भी पुरुषों से जोड़कर देखता है।
अंतिम संस्कार के बाद बेटियों ने समाज से मां के श्राद्ध कर्म के लिए सहयोग की अपील की। उनका कहना था कि मां की आत्मा की शांति के लिए वे सभी संस्कार पूरे करना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक और सामाजिक सहयोग के बिना यह मुश्किल है। यह पीड़ा जब एक वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर सामने आई, तो मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज के आत्ममंथन का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होते ही हालात बदलने लगे। जो गांव और रिश्तेदार पहले मुंह मोड़े हुए थे, वे अब मदद के लिए आगे आने लगे हैं। ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग देना शुरू कर दिया है और रिश्तेदार भी घर पहुंचने लगे हैं। कुछ सामाजिक संगठनों और जागरूक लोगों ने भी बेटियों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
बेटियों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें लगा कि समाज ने उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ दिया है, लेकिन अब मिल रहा सहयोग उनके लिए बड़ी राहत है। यह घटना समाज को आईना दिखाती है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं और जरूरत इस बात की है कि समाज समय पर संवेदनशीलता दिखाए।
@MUSKAN KUMARI







