पटना में जहानाबाद की एक NEET छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। नीतीश कुमार सरकार ने इस गंभीर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी, जिसे राज्यपाल की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बाद राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, इतने बड़े फैसले के बावजूद पीड़ित छात्रा के परिजनों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
छात्रा के परिजनों ने सीबीआई जांच पर भी भरोसा जताने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें न तो बिहार सरकार पर विश्वास है और न ही बिहार पुलिस पर। परिजनों की मांग है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके।
परिजनों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी और अब प्रस्तावित सीबीआई जांच—दोनों ही उनके भरोसे पर खरी नहीं उतरतीं। उनका कहना है कि अब तक एसआईटी के कामकाज से यह आशंका गहरी हो गई है कि अहम सबूतों को या तो नष्ट कर दिया गया है या फिर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
पीड़ित परिवार ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि डीजीपी से हुई मुलाकात के दौरान उनका व्यवहार अपमानजनक और धमकी भरा था। परिजनों के अनुसार, डीजीपी ने यह कहकर डराने की कोशिश की कि यदि मामला सीबीआई को सौंपा गया तो एजेंसी उन्हें दो साल तक दौड़ाती रहेगी। इस कथित बयान से परिवार मानसिक रूप से बेहद आहत है।
परिजनों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी। शुरुआत से ही उनकी मांग न्यायिक जांच की रही है। उनका कहना है कि अगर जांच उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाती है, तभी उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय मिलने की उम्मीद है।
@MUSKAN KUMARI







