पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा कि यह सोचकर मन में सवाल उठता है कि अगर नेताजी आज जीवित होते, तो क्या चुनाव आयोग उन्हें भी अपनी नागरिकता और वोट देने की पात्रता साबित करने के लिए सुनवाई में बुलाता?
ममता बनर्जी ने SIR की तुलना “दानव” से करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में अब तक 110 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तार्किक गड़बड़ी के नाम पर नेताजी से भी पूछा जाता कि वे भारतीय हैं या नहीं। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब नेताजी के पोते चंद्र बोस को भी चुनाव आयोग की ओर से सुनवाई का नोटिस भेजा गया है। इस दौरान चंद्र बोस और उनके भाई सुगाता बोस मंच पर मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के तहत लाखों लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और इससे आम जनता में डर और असमंजस का माहौल है। उन्होंने 92 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश और पूर्व विदेश सचिव कृष्णन श्रीनिवासन को भेजे गए नोटिस का भी जिक्र किया।
ममता बनर्जी ने भाजपा पर बंगाल की ऐतिहासिक विरासत को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार और भगवा खेमे की कोशिश है कि बंगाल और बंगालियों के योगदान को भुला दिया जाए। उन्होंने कहा कि इतिहास को नए सिरे से लिखने की कोशिश की जा रही है और कुछ विवादास्पद चेहरों को महिमामंडित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “आज आप सत्ता में हैं, कल नहीं रहेंगे। लक्ष्य दानवता नहीं, मानवता की स्थापना होना चाहिए।”
@MUSKAN KUMARI







