नई दिल्ली।
1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी–विकासपुरी हिंसा मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया है। इस मामले में दो लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सज्जन कुमार को राहत देते हुए उन्हें दोषमुक्त करार दिया।
सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि वह कभी भी ऐसे दंगों में शामिल नहीं रहे और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। सज्जन कुमार ने अदालत में यह भी दावा किया कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर उन्हें इस मामले में फंसाया है।
इससे पहले नवंबर 2025 में सज्जन कुमार की अपील पर दिल्ली कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया था और जवाब के लिए अगली सुनवाई 28 जनवरी 2026 तय की गई थी। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2025 में एक अन्य 1984 सिख दंगा मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
एसआईटी ने इस मामले को वर्ष 2015 में दोबारा खोला था। सज्जन कुमार के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज थीं—पहली 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और अवतार सिंह की हत्या को लेकर और दूसरी 2 नवंबर 1984 को गुरुचरण सिंह को जिंदा जलाने की घटना से संबंधित थी। दोनों मामलों में वह ट्रायल का सामना कर रहे थे।
बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि सज्जन कुमार का नाम शुरुआती एफआईआर में नहीं था और बाद में साजिश के तहत जोड़ा गया। वहीं सीबीआई की ओर से भी कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। सभी पहलुओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी करने का आदेश दिया।
@MUSKAN KUMARI







