सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और न्याय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अरावली पहाड़ियों के मामले में पिछले आदेश पर रोक लगाई और उन्नाव रेप केस में सीबीआई की अपील पर हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने सोमवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में अपने—और उच्च न्यायालय के—पूर्व निर्णयों को पलटते हुए बड़े फ़ैसले सुनाए हैं, जिनका देश की न्यायिक प्रक्रिया और पर्यावरण रक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
सबसे पहले अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने 20 नवंबर 2025 को दिए अपने आदेश को स्थगित (Stay) कर दिया है, जिसमें अरावली की नई परिभाषा को स्वीकार किया गया था। कोर्ट ने इस दिशा में और गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश दिया है, जो पर्यावरण संरक्षण और नई परिभाषा के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करेगा। कोर्ट ने केंद्र सहित चार राज्यों को नोटिस भी जारी किया है और अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 के लिए निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पर्यावरण विशेषज्ञों, कांग्रेस नेताओं व आंदोलनकारियों ने स्वागत की भावना से लिया है और इसे न्याय व प्रकृति की सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
दूसरे फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्नाव रेप मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत (बेल) को रद्द कर दिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पलटते हुए सेंगर को जमानत न देने का आदेश दिया है, जिससे वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई की अपील स्वीकार की और स्पष्ट किया कि संवेदनशील मामलों में न्याय की शुचिता बनाए रखना सर्वोपरि है।
इन दोनों फैसलों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण और न्यायपालिका की निष्पक्षता दोनों ही मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
@MUSKAN KUMARI







