बिहार की सियासत में एक बार फिर उपेंद्र कुशवाहा को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कोटे से बिहार विधान परिषद (MLC) भेजे जाने पर सहमति बन गई है। दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और अब उन्हें मंगल पांडेय की जगह विधान परिषद भेजे जाने की तैयारी है। यह सीट पांच साल के लिए होगी, जिससे दीपक प्रकाश 2030 तक MLC बने रह सकते हैं।
इस राजनीतिक फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य के लिए अपनी राज्यसभा सदस्यता गंवाने को तैयार हैं? कुशवाहा का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है और भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के मूड में नहीं है।
क्यों मंगल पांडेय की जगह दीपक प्रकाश को बनाया जा रहा MLC?
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद NDA के चार MLC विधायक बन चुके हैं, जिनमें भाजपा के सम्राट चौधरी और मंगल पांडेय शामिल हैं, जबकि जदयू के राधा चरण सेठ और भगवान सिंह कुशवाहा भी विधायक बने हैं। मंगल पांडेय का विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, ऐसे में उनकी सीट पर दीपक प्रकाश को भेजे जाने से भाजपा को लंबे समय तक स्थायित्व मिलेगा और सरकार में संतुलन भी बना रहेगा।
क्यों उपेंद्र कुशवाहा को रिपीट नहीं कर सकती भाजपा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे दो बड़े कारण हैं—
पहला, NDA पहले ही परिवारवाद के आरोपों से घिरा हुआ है। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी को पहले विधानसभा का टिकट दिया गया और अब बेटे को MLC बनाए जाने से भाजपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप और मजबूत हो सकता है।
दूसरा, भाजपा अब राज्यसभा की सीट पर अपने किसी मजबूत जमीनी कार्यकर्ता या सवर्ण चेहरे को आगे बढ़ाना चाहती है। उपेंद्र कुशवाहा को पहले सवर्ण कोटे से राज्यसभा भेजा गया था, लेकिन अब पार्टी रणनीति बदल सकती है।
पहले भी सहयोगी नेताओं को मिला मौका, लेकिन रिपीट नहीं
भाजपा इससे पहले भी अपने सहयोगी दलों के नेताओं को जरूरत के हिसाब से विधान परिषद या राज्यसभा भेजती रही है, लेकिन रिपीट बहुत कम किया गया है। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद VIP प्रमुख मुकेश सहनी को MLC बनाया गया था, लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बिगड़ने पर उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया।
JDU का समर्थन पहले ही खत्म
उपेंद्र कुशवाहा के लिए जदयू का रास्ता पहले ही बंद हो चुका है। सीट बंटवारे और सत्ता में भागीदारी को लेकर जदयू ने साफ कर दिया था कि उसका गठबंधन केवल भाजपा से है। ऐसे में कुशवाहा पूरी तरह भाजपा पर ही निर्भर हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान हुई थी डील
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा और उपेंद्र कुशवाहा के बीच एक लोकसभा सीट और एक विधान परिषद सीट को लेकर समझौता हुआ था। कुशवाहा ने काराकाट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जबकि विधान परिषद की सीट अब उनके बेटे दीपक प्रकाश को दी जा रही है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के बिहार प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने बताया कि भाजपा ने 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले एक MLC पद देने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।
@Tanya Singh
Author: BiharlocalDesk
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