चंडीगढ़। हरियाणा सरकार उस समय असहज स्थिति में आ गई जब केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नए पुलिस महानिदेशक (DGP) के प्रस्ताव को लौटा दिया। UPSC ने इस प्रस्ताव में गंभीर प्रक्रियात्मक खामी की ओर इशारा करते हुए गेंद दोबारा राज्य सरकार के पाले में डाल दी है।
UPSC ने स्पष्ट किया कि मौजूदा DGP शत्रुजीत सिंह कपूर अभी केवल अवकाश (Leave) पर हैं, न कि सेवानिवृत्त या पद से हटाए गए हैं। ऐसे में 13 दिसंबर को उनका दो महीने का अवकाश समाप्त होते ही वे तकनीकी रूप से फिर से DGP के पद पर लौट सकते हैं। इस स्थिति में वर्तमान में DGP का पद रिक्त (Vacant) माना ही नहीं जा सकता।
आत्महत्या प्रकरण से जुड़ा मामला
दरअसल, 14 अक्टूबर को शत्रुजीत सिंह कपूर उस समय अवकाश पर चले गए थे, जब उन्हें IPS अधिकारी वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या के मामले में FIR में नामजद किया गया। पुरन कुमार के परिवार ने कपूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।
इसके बाद हरियाणा सरकार ने जल्दबाज़ी में 1992 बैच के IPS अधिकारी ओ.पी. सिंह को कार्यवाहक DGP (Acting DGP) नियुक्त कर दिया। हालांकि, ओ.पी. सिंह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
UPSC ने क्यों लौटाया प्रस्ताव?
UPSC का कहना है कि नए DGP के चयन के लिए पैनल तभी भेजा जाता है जब राज्य सरकार को यह स्पष्ट हो कि DGP का पद वास्तव में खाली होने वाला है। लेकिन मौजूदा स्थिति में:
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शत्रुजीत सिंह कपूर अभी भी सेवा में हैं
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केवल अवकाश पर हैं, न कि बर्खास्त या सेवानिवृत्त
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13 दिसंबर को वे वापस कार्यभार संभाल सकते हैं
ऐसे में नए DGP के चयन की प्रक्रिया नियमों के खिलाफ मानी जा रही है।
सरकार के सामने अब क्या विकल्प?
अब हरियाणा सरकार के पास तीन ही रास्ते बचे हैं:
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कपूर को औपचारिक रूप से हटाया जाए, तभी नया चयन संभव
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कपूर की वापसी के बाद ही आगे निर्णय लिया जाए
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या फिर पूरी चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए
प्रशासनिक हलचल तेज
इस घटनाक्रम के बाद राज्य के गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए नया निर्णय ले सकती है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






