भाकपा – माले ने फुलवारीशरीफ आतंकी घटना को लेकर बनाया जांच टीम

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भाकपा -माले ने मामले में आतंकी घटना के सबूत से किया इंकार

पटना .के फुलवारीशरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के टेरर कैंप का खुलासा होने के बाद भाकपा – माले ने अब मामले की सच्चाई उजागर करने के लिहाज से एक जांच टीम बनाई। इस जांच टीम ने गिरफ्तार किए गये अभियुक्तों के परिवार से मुलाकात कर उनकी सच्चाई जानने की कोषिष की। इस लिहाज से पार्टी के विधायक व नेताओं ने पुलिस द्वारा घोषित संदिग्ध इलाकों का भ्रमण किया। साथ ही भाजपा पर यह आरोप लगाया कि एक खास धर्म को उनके द्वारा निषाना बनाया जा रहा है। जिससे वह खौफ के साए में जी सकें। सोमवार को फुलवारी इलाके में भाकपा – माले के राज्य सचिव कुणाल व पार्टी विधायक दल के नेता महबूब आलम समेत अन्य नेताओं ने इलाके का भ्रमण किया। साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गये अभियुक्तों के परिवार से मिलकर जानकारियां इक्ट्ठा की ताकि मामले की सचई को जाना जा सके। भाकपा -माले ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसिया तंत्र ने इस मामले को बढ़ा-चढ़ा कर पेष किया है। जो केंद्र सरकार की 2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति है। जिसके तहत एक खास धर्म को निषाना बनाया जा सके और वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। साथ ही संगठन के नेताओं ने केंद्र के साथ ही राज्य सरकार पर भी निषाना साधा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने भी मामले पर अब तक कोई उचित प्रतिक्रिया नहीं दी है। भाकपा -माले नेताओं ने पुलिस पर आरोप लगाया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर अब तक ठोस आतंकवाद के सबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में संगठन की ओर से जांच कर आम लोगों के बीच सच लाने का प्रयास किया जाएगा। एक खास धर्म को निषाना बनाकर उन्हें प्रताड़ित करने की रणनीति को बंद करना पड़ेगा। सांप्रदायिक ध्रवीकरण की इस साजिष के तहत कई निर्देष लोगों को फंसाया जा रहा है। भाकपा-माले व इंसाफ मंच ने प्रदेष के कई जिलों में इस मामले के खिलाफ नागरिक प्रतिवाद का भी आयोजन किया। जांच टीम ने गिरफ्तार किए गये कई अभियुक्तों के परिजनों से मुलाकात की। साथ ही यहां के एएसपी मनीष कुमार से बात की। साथ ही यहां के प्रमुख मुस्लिम समुदाय के लोगों से भी मिलकर मामले की सच्चाई जानने की कोषिष की। जांच टीम ने गिरफ्तार किए गये अभियुक्तों के पिरजनों, स्थानीय लोग व पीएफआई के लिए दिए गये कार्यालय अहमद पैलेस की छानबीन के बाद। आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किए गये 4 लोगों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

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