Army Recruitment Model: पांच साल के भीतर ही सेना में भर्ती हुए 50% सैनिक होंगे रिटायर, पढ़ें क्या है टूर ऑफ ड्यूटी मॉडल?

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Army Recruitment Model: 2020 में Covid-19 महामारी फैलने के बाद, दो साल पहले सेना में सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई थी। सेना में शामिल होने की इच्छा रखने वाले युवकों ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

सेना भर्ती रद्द करने के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन हुआ था। CNN-News18 ने सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रस्तावित भर्ती मॉडल अंतिम चरण में है। इस मॉडल को टूर ऑफ ड्यूटी (ToD) कहा गया है। पिछले दो हफ्तों में इसे लेकर कई बैठक भी हुई हैं।

सूत्रों के अनुसार, मॉडल के वर्तमान मसौदे में कहा गया है कि भारतीय सेना में सभी सैनिकों की भर्ती टूर ऑफ ड्यूटी मॉडल के तहत की जाएगी। उनमें से लगभग 25% सेना में तीन साल और 25% सैनिक पांच साल तक अपनी सेवा देंगे।

सूत्रों ने कहा कि जैसा कि अभी मसौदा तैयार है, बाकी 50% सेना में तब तक सेवा करते रहेंगे, जब तक कि वे अपनी रिटायरमेंट की उम्र तक नहीं पहुंच जाते। सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि शुरुआती गणना से पता चलता है कि इससे

रक्षा पेंशन बिलों के एक जरूरी हिस्से को बचाया जा सकता है।

यह भी प्रस्तावित किया गया है कि तीन और पांच साल पूरे करने वाले 50% सैनिकों को राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में शामिल किया जाएगा। साथ ही उन्हें एक तय समय के लिए कुछ मेडिकल बेनिफिट दिए जाएंगे। यह वही बेनिफिट होंगे, जो सशस्त्र बलों के रिटायर होने वाले कर्मियों को मिलते हैं।

इस सूत्र ने कहा कि यह प्रस्तावित भर्ती मॉडल अधिकारियों पर लागू नहीं हो सकता है और इसके तहत केवल सैनिकों को ही नियुक्त किया जा सकता है। पिछले साल दिसंबर में संसद में पेश किए गए डेटा के अनुसार, सेना में 7,476 अधिकारियों की कमी है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को कब लॉन्च किया जाएगा, इसकी सही समय सीमा तुरंत साफ नहीं है। सेना को प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।

News18 को मिले नए आंकड़ों के अनुसार, Covid-19 महामारी के कारण भर्तियों को रोक दिए जाने के बाद पिछले दो सालों में 1.1 लाख सैनिकों की कमी हुई है। यह कमी हर महीने लगभग 5,000 सैनिकों के हिसाब से बढ़ रही है।

‘ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की जरूरत’

भारतीय सेना मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के भीतर एक बार में लगभग 40,000 रंगरूट को ट्रेन किया जा सकता है। यह व्यवस्था हर साल 60,000 सैनिकों के रिटायरमेंट के बाद खाली हुए पदों को भरने के लिए काफी मानी जाती है।

जनरल ड्यूटी सैनिकों के लिए, जहां ट्रेनिंग पीरियड 34 हफ्ते है, तो वहीं ट्रेड्समैन के लिए यह 19 हफ्ते है। सूत्रों के अनुसार, भले ही भर्तियों की संख्या तुरंत बढ़ा दी जाए, लेकिन इन सभी रिक्तियों को भरने के लिए छह से सात साल का समय लगेगा।

एक दूसरे सूत्र ने कहा कि अगर ToD को लागू किया जाता है और नए रंगरूटों के लिए बेसिक ट्रेनिंग को घटाकर 19 हफ्ते कर दिया जाता है, तो भी पिछले दो सालों में पैदा हुई सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए लगभग चार साल लगेंगे।

इसने आगे कहा, लेकिन साथ ही तीन और पांच साल पूरे होने के बाद, ToD के जरिए आए सैनिक भी रिटायर होंगे। उनके बाद जो पद खाली होंगे, वे भी इसमें जुड़ने शुरू हो जाएंगे।

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