न्यूज रेटिंग्स दोबारा शुरू होने पर ब्रॉडकास्टर्स बना रहे हैं ये प्लान

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सरकार द्वारा न्यूज चैनल्स की रेटिंग को दोबारा शुरू किए जाने की मंजूरी दिए जाने और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर उत्साहित न्यूज ब्रॉडकास्टर्स अब अपने विज्ञापन दरों में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। वैसे चुनावों के मद्देनजर पहले ही कुछ नेटवर्क विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी कर चुके हैं, वहीं अब अन्य ब्रॉडकास्टर्स भी इसका पालन करने की मन बना रहे हैं, क्योंकि सरकार ने टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) को न्यूज व्युअरशिप डेटा जारी करने को लेकर हरी झंडी दे दी है।

न्यूज डेटा की बहाली से कई चैनल्स के लिए कुछ अच्छा होने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले 15 महीनों में रेटिंग के ब्लैकआउट हो जाने से भी बड़े न्यूज नेटवर्क पर ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) के सीईओ विकास खनचंदानी ने कहा कि न्यूज डेटा को फिर से शुरू किए जाने से इस जॉनर में विज्ञापन राजस्व में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि रिपब्लिक नेटवर्क बेहद खुश है कि रेटिंग दोबारा से शुरू हो रही है। एनबीएफ टीम और उसके सदस्य कुछ समय से सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विज्ञापनदाताओं और एजेंसी पार्टनर्स को ट्रांसपेरेंसी देना जरूरी है और डेटा का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। रेटिंग जारी होने से उन जॉनर के ब्रैंड्स से और ज्यादा बिजनेस लाने में मदद मिलेगी, जो विज्ञापनों में काफी निवेश करते हैं।

एक प्रमुख न्यूज नेटवर्क के ऐड सेल्स हेड ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अगले दो महीने न्यूज चैनल्स के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की तरह होंगे, क्योंकि दर्शकों की संख्या में वृद्धि और रेटिंग डेटा की बहाली के चलते इस जॉनर में विज्ञापनों की संख्या में बढ़त देखने को मिलेगी।

ऐड सेल्स हेड ने कहा, ‘चूंकि चुनाव नजदीक हैं और न्यूज डेटा भी जारी होने वाले हैं, लिहाजा ब्रॉडकास्टर्स, विशेष तौर पर बड़े ब्रॉडकास्टर्स के लिए अच्छा होगा, क्योंकि ये ऐड इनवेंट्री के लिए सही मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। वैसे रेटिंग ब्लैकआउट के बाद, विज्ञापनों की डील पिछले डेटा के अनुमान के आधार पर ही की जा रही थी, जोकि अक्टूबर 2020 में जारी किए गए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके नेटवर्क ने पहले ही अगले तीन महीनों तक विज्ञापनों की कीमतें लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं, क्योंकि सप्लाई सीमित है, जबकि डिमांड और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगले तीन महीने न्यूज जॉनर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस बीच न्यूज के लिए डेटा तेजी से बढ़ेगा। जैसे स्टार स्पोर्ट्स के लिए आईपीएल है, वैसे ही इस समय न्यूज चैनल्स के लिए राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। किसी भी चुनावी मौसम में, न्यूज चैनल अपने कुल टॉप लाइन का कम से कम 8-10 प्रतिशत ज्यादा कमाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि डेटा जारी होने के बाद सभी न्यूज चैनल्स अपनी कीमतों में संशोधन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘एक बार डेटा जारी हो गया तो उसके बाद, न्यूज चैनल संशोधित की गई कीमतों के साथ सामने आएंगे। वैसे सप्लाई कमोवेश वैसी ही रहने वाली है, लेकिन जो चीज खेल को बदल देगी वह है कीमतें। वैसे भी कीमतें चैनल के मार्केट शेयर पर भी निर्भर करेगी।

एक अन्य न्यूज नेटवर्क के ऐड सेल्स हेड ने कहा कि डेटा के अभाव के चलते न्यूज चैनल्स को बढ़ी हुई कीमतों को प्राप्त करना मुश्किल होगा। हालांकि, डेटा के जारी होने में यदि 5-6 हफ्ते की देरी हो जाती है, तो न्यूज चैनल्स को ज्यादा फायदा नहीं होगा।

ऐड सेल्स हेड ने कहा कि रेटिंग के अभाव में, चुनावों के दौरान दर्शकों की संख्या में वृद्धि के कारण बढ़े हुए रेवेन्यू को प्राप्त करना मुश्किल होगा। यदि न्यूज रेटिंग जारी हो जाती हैं तो इससे बढ़ी हुई दरें प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हालांकि, डेटा यदि 5-6 सप्ताह के बाद जारी होता है, तो यह काफी निराशाजनक होगा, क्योंकि उस समय तक चुनाव लगभग खत्म हो चुके होंगे।

हालांकि उन्होंने कहा कि वैसे न्यूज डेटा दोबारा शुरू होने का फायदा अगले वित्त वर्ष में मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यूज चैनल्स पर ऐड इनवेंट्री की मांग होगी और चुनाव के कारण बहुत सारा पैसा अन्य जॉनर से न्यूज चैनल्स की ओर में स्थानांतरित हो जाएगा। चूंकि हमारी सप्लाई सीमित है, इसलिए हम मूल्य निर्धारण करने में सक्षम होंगे। वैसे अभी स्थिति यह है कि डेटा के अभाव में विज्ञापनदाता सही कीमत देने को तैयार नहीं हैं। लेकिन डेटा जारी होने के बाद उनके पास यह बहाना भी नहीं होगा।

ऐड सेल्स हेड के मुताबिक, ‘सभी न्यूज चैनल्स का प्रयास होगा कि वे विज्ञापन दरों में वृद्धि करें। और फिर रेटिंग आने से एजेंसियों को अपने क्लाइंट्स को भी यह बताने में मदद मिलेगी कि उनके द्वारा बढ़ायी गईं दरें जायज हैं। वहीं, एफएमसीजी सेक्टर भी फिर से इस ओर वापस आ जाएगा, वैसे फिलहाल उन्होंने न्यूज चैनल्स पर अपने खर्च में काफी कमी की हुई है। कोविड-19 के बाद से न्यूज जॉनर की हिस्सेदारी भी बढ़ गई है। कोविड-19 के दौरान न्यूज जॉनर ने एफएमसीजी के लिए अच्छा काम किया है। वहीं, बहुत से बड़े स्टार्ट-अप भी न्यूज पर अधिक पैसा लगाने की कोशिश करेंगे।’

एक न्यूज चैनल के रेवेन्यू हेड ने बताया कि रेटिंग ब्लैकआउट से बड़े नेटवर्क और उनके न्यूज चैनल्स प्रभावित नहीं हुए हैं। हालांकि, छोटे-मझौले चैनल्स इससे जरूर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और  रेटिंग के दोबारा शुरू होने से सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं को होगा।

उन्होंने कहा कि न्यूज चैनल्स के लिए चीजें अभी और भी बेहतर होंगी। कोविड-19 के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। हर तरफ अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में क्लाइंट्स अभी इंतजार के मूड में है। हम सभी वर्क फ्रॉम होम के चलते लोगों से नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में कुछ न कुछ तो प्रभावित होना तय है।

कीमतें बढ़ाए जाने पर रेवेन्यू हेड ने कहा कि उनका चैनल लगातार अपनी विज्ञापन दरों को बढ़ाए जाने पर काम कर रहा है। हम हर साल कीमतों में संशोधन करते हैं, लेकिन हर चैनल दर कीमतें बढ़ाए जाने पर जोर नहीं देता है। कई नेटवर्क ने ज्यादा से ज्यादा इन्वेंट्री जोड़ने के लिए नए चैनल लॉन्च किए हैं, लेकिन वे मार्केट से दरों में वृद्धि प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

प्रोवोकेटर एडवाइजरी प्रिंसिपल परितोष जोशी ने कहा कि न्यूज चैनल्स ग्रोथ हासिल करने के लिए ऐड इनवेंट्री बढ़ा रहे हैं। हालांकि, कमर्शियल एयरटाइम में वृद्धि ने दर्शकों को अलग-थलग कर दिया है। न्यूज चैनल्स का मानना ​​है कि राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ न्यूज रेटिंग को फिर से शुरू करना विज्ञापन दरों को बढ़ाने का एक सही अवसर है।

उन्होंने कहा, ‘न्यूज चैनल्स के पास राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी विज्ञापन दरों को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। यूपी चुनाव तो न्यूज चैनलों के लिए दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा मौका है। न्यूज रेटिंग को दोबारा होने से तो न्यूज चैनल के मूल्य निर्धारण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’

लेकिन उन्होंने यह भी आगाह किया कि यदि न्यूज चैनल्स ने अभी कीमतों में बढ़ोत्तरी नहीं की, तो उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में सही कीमतें मिलने में करने में कठिनाई होगी। यदि वे इस वित्तीय वर्ष में कीमतों में वृद्धि नहीं करते हैं, तो अगले वित्तीय वर्ष में भी वे अपने मौके को गवां देंगे। रेटिंग के बिना, विज्ञापनदाताओं से सही मूल्य प्राप्त करना मुश्किल है। रेटिंग ब्लैकआउट होने से पहले भी न्यूज चैनल्स की विज्ञापन दरें बढ़ रही थीं।

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