छपरा में फर्जी IAS का पर्दाफाश
छपरा (बिहार)। बिहार के छपरा में प्रशासनिक सतर्कता की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर जिला मुख्यालय में रौब झाड़ने पहुंचे एक शख्स की पोल उस वक्त खुल गई, जब जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात अधिकारियों को उसके दावों पर शक हुआ। जांच होते ही साफ हो गया कि यह व्यक्ति फर्जी है। इसके बाद मौके पर ही उसे पकड़ लिया गया।
कैसे खुली पोल?
सूत्रों के मुताबिक, यह शख्स शूट-बूट, आत्मविश्वास और सरकारी भाषा में बातचीत करते हुए सीधे DM से मिलने पहुंचा। उसने खुद को “IAS” बताकर कुछ “जरूरी प्रशासनिक निर्देश” देने की कोशिश की।
लेकिन DM कार्यालय के प्रोटोकॉल और पहचान-पुष्टि की प्रक्रिया से गुजरते ही उसके बयान लड़खड़ाने लगे।
यहीं से शक गहरा गया और तत्काल सत्यापन कराया गया। परिणाम—फर्जीवाड़ा उजागर।
ठाठ-बाट के पीछे का सच
जांच में सामने आया कि व्यक्ति लंबे समय से अधिकारियों जैसा पहनावा, आत्मविश्वासी लहजा और सरकारी शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करता रहा। कुछ लोगों का दावा है कि वह पहले भी अलग-अलग जगहों पर खुद को “बड़ा अफसर” बताकर घूमा है।
पकड़े जाने के बाद वही व्यक्ति घड़ियाली आंसू बहाते और माफी मांगते दिखा।
प्रशासन की सख्ती
प्रशासन ने मामले को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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फर्जी पहचान से सरकारी कामकाज में दखल
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सार्वजनिक विश्वास को नुकसान
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कानून-व्यवस्था पर असर
इन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर पूछताछ तेज की गई है।
बड़ा सवाल: ऐसे लोग अंदर तक कैसे पहुंच जाते हैं?
यह घटना बताती है कि—
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प्रोटोकॉल पालन कितना जरूरी है
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पहचान-पुष्टि में ढिलाई से क्या खतरे हो सकते हैं
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आम लोगों और संस्थानों को दिखावे से सावधान रहना चाहिए
संदेश साफ है
छपरा प्रशासन की सतर्कता ने एक बड़े फर्जीवाड़े को समय रहते रोक दिया। यह घटना चेतावनी है कि“रुतबा दिखाकर नियम तोड़ने वालों के लिए अब जगह नहीं।”
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि फर्जीवाड़े के खिलाफ कड़ी और मिसाल-कायम करने वाली कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में कोई भी “नटवरलाल” सिस्टम को चकमा न दे सके।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)








