बिहार में लैंड सर्वे से माफिया की मुश्किलें बढ़ीं, फुलवारीशरीफ बना केंद्र बिंदु

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बिहार में लैंड सर्वे से माफिया की मुश्किलें बढ़ीं, फुलवारीशरीफ बना केंद्र बिंदु

बिहार में चल रहे व्यापक भूमि सर्वेक्षण अभियान ने राज्य में भूमाफियाओं की नींद उड़ा दी है। सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड्स को डिजिटल करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया ने उन भूमाफियाओं की पोल खोल दी है, जिन्होंने दशकों से फर्जी कागजात के सहारे जमीनों पर अवैध कब्जा किया है।

फुलवारीशरीफ और अन्य इलाकों में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां स्थानीय माफियाओं ने सरकारी कर्मचारियों से सांठगांठ कर जमीनों की फर्जी रजिस्ट्रियां करवाईं। इन घटनाओं ने न केवल भूमि विवाद को जन्म दिया है, बल्कि कई बार हत्या और हिंसा जैसी घटनाओं को भी बढ़ावा दिया है।

फुलवारीशरीफ में जमीन घोटाले के मामले

पटना के पास स्थित फुलवारीशरीफ में भूमि विवाद के कई मामले सामने आए हैं। यहां स्थानीय माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए गरीब किसानों और कमजोर तबके के लोगों की जमीनों पर कब्जा कर लिया। इन माफियाओं का स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गहरा नेटवर्क है, जिसके चलते ये फर्जीवाड़ा लंबे समय तक चलता रहा।

हाल ही में हुए एक मामले में, फुलवारीशरीफ के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी जमीन पर कुछ बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया। जांच में पता चला कि माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का सौदा किया और इसके एवज में मोटी रकम वसूली।

कैसे काम करते हैं भूमाफिया?

भूमाफिया के काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित और सटीक होता है। इसमें स्थानीय दलाल, सरकारी कर्मचारी, वकील और कई बार पुलिस का भी सहयोग रहता है।

1. फर्जी कागजात बनाना:
भूमाफिया पहले फर्जी कागजात तैयार करवाते हैं। इसके लिए वे राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलकर पुराने दस्तावेजों में हेरफेर करवाते हैं।

2. दबंगई से कब्जा:
जिन लोगों की जमीन को कब्जा करना होता है, उन्हें धमकाया या फंसाया जाता है। कई बार विरोध करने वालों की हत्या तक कर दी जाती है।

3. रजिस्ट्री में हेरफेर:
भूमाफिया जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करवा लेते हैं। इसमें स्थानीय पंजीयन कार्यालय के कर्मचारी शामिल होते हैं, जो इस काम के लिए भारी रिश्वत लेते हैं।

4. लोकल माफियाओं की मदद:
भूमाफिया अक्सर स्थानीय गुंडों के साथ मिलकर जमीन कब्जा करवाते हैं। विरोध करने वालों को डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है।

सरकार की पहल और पुलिस की कार्रवाई

बिहार सरकार ने राज्य में भूमि विवादों को सुलझाने और पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल भूमि सर्वेक्षण शुरू किया है। इसके तहत सभी जमीनों का रिकॉर्ड डिजिटाइज किया जा रहा है।

सरकार के इस कदम से भूमाफिया पर शिकंजा कसने की शुरुआत हुई है। फर्जी दस्तावेजों की पहचान हो रही है और अवैध कब्जे के मामले उजागर हो रहे हैं।

हालांकि, पुलिस और प्रशासन को इस प्रक्रिया में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फुलवारीशरीफ में भूमि विवाद के कारण हाल ही में हुई हिंसा इस बात का प्रमाण है कि भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई करना कितना मुश्किल है।

जनता और समाज पर प्रभाव

भूमाफिया की गतिविधियों का सीधा असर समाज पर पड़ता है। गरीब और कमजोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अपनी जमीन छिन जाने के डर से कई लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते।

इसके अलावा, भूमि विवाद के चलते हत्या, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी होती है। फुलवारीशरीफ में कई बार भूमि विवाद ने सामुदायिक तनाव को भी जन्म दिया है।

क्या करें सरकार और प्रशासन?

भूमाफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए सरकार और प्रशासन को कुछ कदम उठाने होंगे:

1. डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत बनाना:
सभी भूमि रिकॉर्ड्स को डिजिटल किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की हेरफेर संभव न हो।

2. सख्त कानून लागू करना:
भूमाफिया के खिलाफ सख्त कानून बनाकर उन्हें कठोर दंड दिया जाना चाहिए।

3. जनता को जागरूक करना:
लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। जमीन संबंधी विवादों में न्याय पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी जानी चाहिए।

4. स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय करना:
भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण अभियान ने भूमाफिया की गतिविधियों को उजागर कर दिया है। फुलवारीशरीफ जैसे इलाकों में ये समस्या और भी गंभीर है। सरकार और प्रशासन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई करनी होगी। यह जरूरी है कि गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनें सुरक्षित रहें। इसके लिए जनता, प्रशासन और सरकार को मिलकर काम करना होगा, ताकि भूमि विवाद और अपराध पर लगाम लगाई जा सके।

@tanvir

 

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