झारखंड से उत्तराखंड तक फैले नेटवर्क, पुराने गैंग कनेक्शन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता
स्थान: देहरादून
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून शुक्रवार सुबह उस समय सनसनी से भर उठी, जब शहर के व्यस्त कारोबारी क्षेत्र स्थित सिल्वर सिटी मॉल में गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान विक्रम शर्मा के रूप में हुई है। नाम सामने आते ही उसका आपराधिक अतीत, झारखंड से जुड़े पुराने संबंध और संगठित अपराध जगत से कथित नाता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले कथित अपराध नेटवर्क, पुराने गैंग समीकरण और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर पड़ताल का विषय बन गई है।
घटना की सुबह – मॉल में मची अफरातफरी
सुबह का समय था। लोग रोज़मर्रा की तरह मॉल में आ-जा रहे थे। अचानक गोलियों की आवाज़ गूंजी और कुछ ही सेकंड में अफरातफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। निशाना सीधा था, हमला तेज था और हमलावर कुछ ही मिनटों में मौके से फरार हो गए।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह टारगेट किलिंग प्रतीत होती है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर संदिग्धों की तलाश जारी है।
विक्रम शर्मा?
विक्रम शर्मा का नाम उत्तराखंड में भले ही हाल के वर्षों में कारोबारी के रूप में सामने आता रहा हो, लेकिन झारखंड के अपराध जगत में उसका नाम लंबे समय तक चर्चा में रहा।
सूत्रों के अनुसार:
वह देहरादून में जन्मा था।
19 अप्रैल 2017 को रांची पुलिस ने उसे देहरादून से गिरफ्तार किया था।
झारखंड के जमशेदपुर में वह सक्रिय रहा।
उस पर 50 से अधिक आपराधिक मामलों की चर्चा रही है (हालांकि आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग मामलों में भिन्न हो सकती है)।
झारखंड में सक्रिय रहने के दौरान उसका नाम कुख्यात गैंगस्टर Akhilesh Singh के करीबी सहयोगी के रूप में लिया जाता रहा। स्थानीय स्तर पर उसे ‘गुरु’ कहा जाता था — हालांकि इस संबोधन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह अपराध जगत में चलती चर्चाओं का हिस्सा रहा।
झारखंड का अपराध परिदृश्य और कथित गैंग कनेक्शन
जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले दो दशकों में रंगदारी, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और गैंगवार की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इस पृष्ठभूमि में विक्रम शर्मा का नाम कई बार सुर्खियों में रहा।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक:
वह निजी सुरक्षा घेरे के साथ चलता था।
गाड़ियों का काफिला उसके साथ रहता था।
कई हाई-प्रोफाइल वारदातों में उसका नाम चर्चा में आया।
हालांकि, अदालत में दोष सिद्ध होना और आरोप लगना दो अलग बातें हैं। कई मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली, कुछ मामलों में जमानत मिली और कुछ मामलों में जांच लंबित रही।
आर्थिक नेटवर्क – चर्चा, दावे और सवाल
अपराध जगत से जुड़े सूत्रों का दावा है कि विक्रम शर्मा का आर्थिक नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। अनौपचारिक चर्चाओं में उसकी संपत्ति करीब एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती रही है।
लेकिन यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि:
इस संपत्ति का कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
आयकर, प्रवर्तन निदेशालय या अन्य एजेंसियों की किसी सार्वजनिक रिपोर्ट में इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है (अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार)।
हाल के वर्षों में वह देहरादून में रहकर व्यवसाय से जुड़ा बताया जाता है। रियल एस्टेट, ठेकेदारी और निवेश से जुड़े होने की भी चर्चाएं रही हैं।
2017 की गिरफ्तारी – एक महत्वपूर्ण मोड़
19 अप्रैल 2017 को रांची पुलिस ने देहरादून से उसे गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी उस समय चर्चा में आई थी क्योंकि:
झारखंड पुलिस ने इंटर-स्टेट ऑपरेशन चलाया था।
देहरादून से गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया था कि उसका नेटवर्क राज्य सीमाओं से परे था।
कानूनी प्रक्रिया के बाद वह बाहर आया और कथित रूप से अपने व्यवसायिक गतिविधियों में लग गया।
देहरादून में उसकी मौजूदगी और पुलिस निगरानी
यह सवाल अब सबसे बड़ा बनकर उभर रहा है:
यदि किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास इतना चर्चित रहा हो, तो उसकी गतिविधियों पर निगरानी कितनी प्रभावी थी?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार:
वह खुले तौर पर शहर में आता-जाता था।
सामाजिक कार्यक्रमों और कारोबारी बैठकों में भी दिखाई देता था।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि हर व्यक्ति जो जमानत पर या कानूनी प्रक्रिया के बाद बाहर हो, उसे निरंतर हिरासत में नहीं रखा जा सकता। निगरानी कानूनी दायरे में ही संभव होती है।
हत्या के संभावित एंगल
जांच एजेंसियां फिलहाल कई एंगल पर काम कर रही हैं:
1. पुरानी गैंगवार
झारखंड से जुड़े पुराने विवाद क्या फिर उभर आए?
2. आर्थिक विवाद
क्या किसी बड़े आर्थिक लेन-देन में टकराव हुआ?
3. नेटवर्क में अंदरूनी संघर्ष
क्या उसके ही नेटवर्क में किसी स्तर पर मतभेद पनपा?
4. स्थानीय रंजिश
देहरादून में किसी नए कारोबारी विवाद का परिणाम?
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न
देहरादून को अपेक्षाकृत शांत शहर माना जाता है। मॉल जैसे सार्वजनिक स्थान पर दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं:
क्या सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर्याप्त है? क्या सीसीटीवी नेटवर्क पर्याप्त रूप से मॉनिटर हो रहा है? क्या पुलिस की इंटेलिजेंस इनपुट में कोई चूक हुई?
व्यापारी संगठनों ने सख्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
सामाजिक प्रभाव और मनोवैज्ञानिक असर
ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं होतीं, बल्कि शहर की सामाजिक मनोदशा को भी प्रभावित करती हैं।
आम नागरिकों में भय का माहौल कारोबार पर संभावित असरशहर की छवि पर प्रभाव
पर्यटन और शिक्षा के लिए प्रसिद्ध शहर में ऐसी घटनाएं निवेशकों और परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह
हत्या की जांच में निम्न कदम शामिल हैं:
फॉरेंसिक जांच
मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग
सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण
कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच
अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय
यदि यह संगठित अपराध से जुड़ा मामला साबित होता है, तो जांच राष्ट्रीय एजेंसियों तक भी पहुंच सकती है।
अपराध से व्यवसाय तक – क्या संभव है ‘रूपांतरण’?
भारत में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति बाद में व्यवसाय में सक्रिय हो जाते हैं। प्रश्न यह है:
क्या अतीत का साया पूरी तरह समाप्त हो सकता है?क्या पुराने नेटवर्क कभी पूरी तरह टूटते हैं?
विक्रम शर्मा का मामला इसी जटिल सवाल को फिर सामने लाता है।
देहरादून सिल्वर सिटी मॉल हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं है। यह मामला:
इंटर-स्टेट अपराध नेटवर्क
गैंग कनेक्शन
आर्थिक शक्ति
और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों
इन सभी पहलुओं को एक साथ सामने लाता है।
अंततः जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल शहर स्तब्ध है, पुलिस सक्रिय है और कई राज्यों में फैले पुराने कनेक्शन फिर से जांच के घेरे में हैं।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







