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दिल्ली-NCR, बिहार और पश्चिम बंगाल में झटकों का कारण:
आपने बताया कि भूकंप का केंद्र तिब्बत के शिजांग क्षेत्र में था और तीव्रता 7.1 थी। यह एक बड़ा भूकंप माना जाता है। 10 किमी की गहराई भी इसे सतह पर अधिक महसूस कराती है। भारत में, बिहार और उत्तर भारत हिमालयन बेल्ट के करीब हैं, जो टेक्टोनिक प्लेट्स के घर्षण की वजह से प्रभावित होते हैं।
भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, और इसे पूर्वानुमानित करना फिलहाल वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं है। भूकंप का समय और स्थान सटीक रूप से पहले से बताना मुश्किल होता है। हालांकि, कुछ क्षेत्र अधिक भूकंप संभावित होते हैं, जैसे तिब्बत और हिमालय क्षेत्र, जो टेक्टोनिक प्लेटों के एक्टिव जोन में आते हैं।
भूकंप से बचने के उपाय: 1. भूकंप के समय:
खुले स्थान पर जाएं। यदि घर के अंदर हैं, तो मजबूत फर्नीचर (जैसे टेबल) के नीचे छिपें।
दीवार, खिड़की और बिजली के तारों से दूर रहें। लिफ्ट का उपयोग न करें।
2. भूकंप के बाद: सुरक्षित जगह पर रहें। इमारतों की जांच करें कि कहीं कोई नुकसान तो नहीं हुआ। अफवाहों पर ध्यान न दें और अधिकारियों की सलाह का पालन करें। भूकंप आने के संकेत: भूकंप के आने से पहले अक्सर कोई सटीक संकेत नहीं होते, लेकिन कुछ घटनाएं दिख सकती हैं:
पालतू जानवर असामान्य व्यवहार दिखा सकते हैं। पानी के स्रोत (कुएं आदि) में हलचल। कभी-कभी जमीन से हल्की आवाज़ या वाइब्रेशन।
लेकिन ये संकेत हमेशा सही नहीं होते। इसलिए, सतर्क रहना और आपातकालीन तैयारी रखना जरूरी है।