चुनावी साल में नीतीश की मुस्लिम समाज पर नजर, मदरसा बोर्ड शताब्दी समारोह बना सियासी मंच

बिहार मदरसा बोर्ड शताब्दी समारोह: मुस्लिम समाज को साधने की कोशिश में सरकार, नीतीश बोले- “2005 से पहले मुसलमानों के लिए कुछ नहीं हुआ”

पटना (एशियन टाइम्स ब्यूरो)

बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 2005 से पहले मुस्लिम समाज के लिए कोई काम नहीं हुआ था। 24 नवंबर 2005 को एनडीए सरकार बनने के बाद ही विकास की नई शुरुआत हुई।

मदरसा बोर्ड का इतिहास

बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का गठन 4 अगस्त 1922 को हुआ था। 1981 में अधिनियम बनने के बाद बोर्ड को स्वायत्त अधिकार मिले और राज्य के मदरसों को अनुदान व मान्यता देने की प्रक्रिया मजबूत हुई। वर्तमान में बिहार में 1942 अनुदानित और करीब 2430 गैर-अनुदानित मदरसे संचालित हैं। बोर्ड ने प्राथमिक (वस्तानिया) से लेकर उच्च (फाजिल) स्तर तक का पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसे देश-विदेश की संस्थाओं ने मान्यता दी है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन क्लास, कौशल प्रशिक्षण और विज्ञान-इंजीनियरिंग विषयों को जोड़ने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

चुनावी साल में मुस्लिम समाज पर फोकस

इस समारोह में राज्यभर से मदरसों के प्रधान, शिक्षक, समिति सदस्य और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए। अनुमान है कि 15 से 20 हजार लोग मौजूद थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह का बड़ा आयोजन सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचा सकता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने कब्रिस्तानों की घेराबंदी से लेकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों तक कई काम किए हैं। उन्होंने कहा कि “वैसी मुस्लिम महिलाओं जिनके पति ने उन्हें छोड़ दिया था, उन्हें हमने 24 हजार रुपये देना शुरू किया। अब किसी को छोड़ा नहीं जाएगा, लड़कियों के साथ अन्याय मत करिए, उन्हें बहुत दिक्कत होती है।”

नाराजगी को साधने की कोशिश

हाल के दिनों में कई मुस्लिम संगठनों ने कुछ मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई थी, लेकिन अब सरकार संबंध सुधारने की पहल करती दिख रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उर्दू विद्यालयों में उर्दू जानकार शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुस्लिम समाज को साधने की यह कोशिश सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है। मदरसा बोर्ड शताब्दी समारोह के बहाने नीतीश कुमार ने एक तरफ विकास कार्यों का बखान किया तो दूसरी तरफ मुसलमानों के बीच अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी गिनाया।

 

Bihar Desk
Author: Bihar Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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