ग्रेटर नोएडा फर्जी इलाज रैकेट का बड़ा खुलासा गरीबों के नाम पर करोड़ों की ठगी, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार – सिस्टम की पोल खुली

गरीबों के नाम पर करोड़ों की ठगी, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार – सिस्टम की पोल खुली

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से सामने आया यह मामला सिर्फ एक सामान्य ठगी नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और अस्पताल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। बिसरख कोतवाली पुलिस द्वारा उजागर किया गया यह फर्जी इलाज रैकेट दर्शाता है कि कैसे गरीबों और जरूरतमंदों के नाम पर लाखों रुपये का खेल खेला जा रहा था।

यह गिरोह आयुष्मान कार्ड/ईएसआई कार्ड और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का गलत इस्तेमाल कर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराता था और फर्जी दस्तावेजों के जरिए इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलता था।


 मामला क्या है?

ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग अस्पतालों में फर्जी मरीज भर्ती कराकर स्वास्थ्य योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया — एक पूर्व सैनिक की बेटी के नाम पर फर्जी तरीके से इलाज कराया गया, जबकि वास्तविक मरीज कोई और था।

यहीं से पुलिस को पूरे रैकेट की जानकारी मिली।

 आरोपी कौन हैं?

पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है:

  • शिवा सिंह (गाजियाबाद)

  • यश सिंह (शिवा का भाई)

  • जितेंद्र यादव (फिरोजाबाद)

  • दानिश खान (बुलंदशहर) — मुख्य मास्टरमाइंड


मास्टरमाइंड का पूरा नेटवर्क

दानिश खान इस पूरे गिरोह का दिमाग था। वह:

  • अस्पतालों में काम करने वाले लोगों से संपर्क में था

  • गरीब और बीमार लोगों को टारगेट करता था

  • उन्हें सस्ते इलाज का लालच देता था

  • फर्जी दस्तावेज बनवाकर अस्पताल में भर्ती कराता था

उसका नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ था।


 ठगी कैसे होती थी?

यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:

1. टारगेट चयन

गरीब, मजदूर, और इलाज का खर्च न उठा पाने वाले लोगों को चुना जाता था।

2. लालच देना

उन्हें कहा जाता था:
👉 “कम पैसे में बड़े अस्पताल में इलाज होगा”

3. फर्जी पहचान बनाना

  • किसी और के आयुष्मान/ईएसआई कार्ड का इस्तेमाल

  • नाम बदलकर दस्तावेज तैयार करना

  • आधार कार्ड का दुरुपयोग

4. अस्पताल में भर्ती

अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से मरीज को भर्ती कराया जाता था।

5. फर्जी बिलिंग

इलाज का बिल:
👉 3 लाख से 6.5 लाख तक बना दिया जाता था

6. पैसा बांटना

  • गिरोह

  • अस्पताल कर्मचारी

  • एजेंट
    सबके बीच पैसा बांटा जाता था

 सबसे बड़ा खुलासा: मौत के बाद भी खेल जारी

एक मामले में:

  • पूर्व सैनिक की बेटी के नाम पर इलाज हुआ

  • असली मरीज कोई और था

  • इलाज के दौरान मौत हो गई

  • फर्जी नाम से शव सौंप दिया गया

यह मामला पूरे रैकेट के खुलासे की वजह बना।

 अस्पताल की भूमिका

जांच में सामने आया:

  • कुछ अस्पताल कर्मचारी शामिल थे

  • बिना सही डॉक्यूमेंट मरीज भर्ती किए गए

  • फर्जी बिल बनाए गए

  • इलाज की प्रक्रिया में लापरवाही भी हुई

 यह सिर्फ गिरोह नहीं, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत का मामला है।


अब तक कितनी ठगी?

पुलिस के अनुसार:

  • करीब 40 लोगों को बनाया गया शिकार

  • 10 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी

  • कई केस अभी सामने आना बाकी हैं


 पुलिस का बयान

डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया:

“यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और गरीब लोगों को निशाना बना रहा था। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।”


 जांच में सामने आए बड़े सवाल

 1. अस्पतालों की जिम्मेदारी कहाँ है?

क्या अस्पताल बिना जांच के मरीज भर्ती कर रहे थे?

 2. आयुष्मान योजना सुरक्षित है?

अगर कार्ड का दुरुपयोग इतना आसान है, तो सुरक्षा कहाँ है?

 3. डेटा लीक कैसे हुआ?

आधार और हेल्थ कार्ड की जानकारी गिरोह तक कैसे पहुंची?


आयुष्मान योजना का दुरुपयोग

सरकार ने आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए शुरू की थी, लेकिन:

  • फर्जी क्लेम

  • नकली मरीज

  • फर्जी बिल

इस योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बना दिया गया।


 सिस्टम की कमजोरी

यह मामला दिखाता है:

  • डेटा सुरक्षा कमजोर है

  • अस्पतालों पर निगरानी कम है

  • फर्जीवाड़ा पकड़ने का सिस्टम कमजोर है


 अपराध का नया मॉडल

यह पारंपरिक चोरी नहीं है, बल्कि:

“डॉक्यूमेंट + सिस्टम + नेटवर्क = सफेदपोश अपराध”

 कानूनी धाराएं

आरोपियों पर लग सकती हैं:

  • IPC 420 (धोखाधड़ी)

  • IPC 468 (जालसाजी)

  • IPC 471 (फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल)

  • आपराधिक साजिश

 समाज पर असर

  • गरीबों का भरोसा टूटता है

  • सरकारी योजनाएं बदनाम होती हैं

  • असली मरीजों को नुकसान होता है

 कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?

✔ अपना कार्ड किसी को न दें
✔ अस्पताल में खुद दस्तावेज जांचें
✔ संदिग्ध एजेंट से दूर रहें
✔ सरकारी पोर्टल से जानकारी लें


आगे क्या?

पुलिस:

  • और आरोपियों की तलाश में है

  • अस्पतालों की जांच करेगी

  • पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव 

ग्रेटर नोएडा का यह मामला सिर्फ एक गिरोह की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि कैसे सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर गरीबों को लूटा जा रहा है।

जब तक सिस्टम मजबूत नहीं होगा, ऐसे गिरोह पनपते रहेंगे।

@AUP

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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