मुजफ्फरपुर की विशेष अदालत सख्त, पुलिस पर ही पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी
मुजफ्फरपुर:
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। POCSO एक्ट से जुड़े एक मामले में गवाही देने से बचने वाले तीन तत्कालीन सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) अब खुद कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं।
विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 के न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्र ने अखिलेश प्रसाद, सुमनजी झा और त्रिलोकीनाथ झा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। ये तीनों अलग-अलग समय पर इस मामले के जांच अधिकारी (आईओ) रह चुके हैं, लेकिन लगातार अदालत में पेश नहीं होने के कारण केस की सुनवाई प्रभावित हो रही थी।
अदालत ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए अहियापुर थानाध्यक्ष को वारंट की प्रति भेजने का निर्देश दिया है। अब पुलिस पर ही अपने पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी आ गई है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है।
क्या है मामला
यह केस 2 मार्च 2021 को दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 1 मार्च 2021 को घर लौटने के दौरान आरोपियों ने उसकी भतीजियों के साथ छेड़खानी की। विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौज की घटना भी हुई। आरोप है कि मुख्य आरोपी अरविंद कुमार उर्फ अरविंद ठाकुर के साथ अन्य आरोपियों ने मिलकर पीड़ित पक्ष पर हमला किया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।
सुनवाई में देरी का कारण
मामले की जांच तीनों एएसआई ने अलग-अलग समय पर की थी। इनमें से एक ने दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि अन्य के खिलाफ जांच लंबित रही। फिलहाल सेशन ट्रायल जारी है, लेकिन पांच गवाहों में से दो की ही गवाही हो सकी है।
तीनों जांच अधिकारियों के अदालत में पेश न होने के कारण सुनवाई लंबे समय से अटकी हुई थी। अब अदालत के सख्त रुख से साफ संकेत है कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी कानून से छूट नहीं मिलेगी।
@MUSKAN KUMARI






