पटना। Punaichak चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत और कथित दुष्कर्म के मामले ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। घटना के 11 दिन बाद भी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा औपचारिक रूप से केस टेकओवर नहीं किए जाने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। जांच की दिशा, डीएनए रिपोर्ट और एजेंसियों की भूमिका को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो गई है।
रोहिणी
आचार्य का हमला, पारदर्शिता पर सवाल
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कैसा अनुसंधान, कैसी जांच कर रही SIT और बिहार पुलिस? इतने गंभीर और संवेदनशील मामले में जांच और पूछताछ की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है।”
रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि CBI जांच की सिफारिश के 11 दिन बाद भी एजेंसी द्वारा औपचारिक रूप से कमान नहीं संभालना यह संकेत देता है कि “बड़े लोगों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिशें” हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पूरा बिहार सच सामने आने और दोषियों को सख्त सज़ा मिलने की उम्मीद कर रहा है।
SIT का दावा: जांच जारी, डीएनए सबसे अहम कड़ी
राज्य पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) का कहना है कि जांच निरंतर जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब तक दर्जनों संदिग्धों के सैंपल लिए जा चुके हैं। 25 डीएनए रिपोर्ट मिल चुकी हैं, लेकिन वे घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से मेल नहीं खाईं।
हाल ही में जहानाबाद के तीन और संदिग्धों के नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि डीएनए मैच इस केस की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकता है। हालांकि लगातार नेगेटिव रिपोर्ट आने से जांच की दिशा को लेकर नई उलझनें पैदा हो रही हैं।
आधी रात नोटिस, गांव में हंगामा
SIT की कार्रवाई पर भी सवाल उठे हैं। टीम देर रात गांव पहुंची और परिजनों को नोटिस देने की कोशिश की, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। परिवार का आरोप है कि जब सार्वजनिक रूप से CBI जांच की बात कही जा चुकी है, तब भी पुलिस दबाव बना रही है।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि जब तक CBI औपचारिक रूप से केस टेकओवर नहीं करती, तब तक राज्य पुलिस को कानूनी प्रक्रिया जारी रखनी होगी।
हॉस्टल सील, छात्राओं का सामान लौटाया गया
घटना स्थल रहे शंभू गर्ल्स हॉस्टल को पहले ही सील किया जा चुका है। कोर्ट के निर्देश पर छात्राओं का सामान पुलिस की मौजूदगी में वापस कराया गया। इसके बाद इमारत को दोबारा सील कर दिया गया ताकि साक्ष्य सुरक्षित रह सकें। पुलिस इसे जांच प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।
बड़ा सवाल: देरी क्यों?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि CBI द्वारा केस लेने की प्रक्रिया में राज्य सरकार की सिफारिश, केंद्र की मंजूरी और औपचारिक अधिसूचना जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में देरी तकनीकी भी हो सकती है, लेकिन संवेदनशील मामलों में समय की अहमियत और बढ़ जाती है।
इस बीच विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि जांच पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध हो।
NEET छात्रा रेप-डेथ केस अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है। डीएनए रिपोर्ट, CBI की औपचारिक एंट्री और SIT की अगली कार्रवाई पर पूरे राज्य की नजर टिकी है। सच कब और कैसे सामने आएगा—यह आने वाले दिनों में साफ होगा
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







