केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान सामने आई। बेंच ने कहा कि केवल एनसीईआरटी से समीक्षा करवाने के बजाय केंद्र को पाठ्यक्रम की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनानी चाहिए थी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट क्लास आठ की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका को लेकर प्रकाशित आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े सुओ मोटू मामले की सुनवाई कर रहा था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने सिर्फ कक्षा आठ ही नहीं, बल्कि सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा के निर्देश दिए हैं और इसके लिए डोमेन विशेषज्ञों का पैनल भी बनाया जाएगा।
तुषार मेहता ने यह भी बताया कि एनसीईआरटी में व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े बदलाव शुरू कर दिए गए हैं। अब किसी भी नई सामग्री को प्रकाशित करने से पहले विशेषज्ञों की मंजूरी अनिवार्य होगी। वहीं, एनसीईआरटी के निदेशक ने कोर्ट में हलफनामा देकर बिना शर्त माफी भी मांग ली है।
इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की इस किताब की छपाई और ऑनलाइन वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि किताब में लिखी बातें न्यायपालिका पर गोली चलाने जैसी हैं और इससे संस्थान की गरिमा को गहरा आघात पहुंचा है। अदालत ने इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने की साजिश बताते हुए बाजार में मौजूद सभी प्रतियों को तुरंत जब्त करने और सार्वजनिक पहुंच से हटाने का आदेश दिया था।
@MUSKAN KUMARI







