भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार को PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे रवाना हुआ। इस उड़ान में कुल 15 सह-उपग्रह शामिल थे।
हालांकि, मिशन के दौरान पीएसएलवी के PS3 स्टेज के अंतिम चरण में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। इस स्टेज में असामान्य घुमाव (रोटेशन) देखा गया, जिससे मिशन के परिणामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। गौरतलब है कि पिछली उड़ान में भी इसी स्टेज से जुड़ी समस्या सामने आई थी। ISRO ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है।
‘अन्वेषा’ उपग्रह में अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक लगी है, जो जंगलों की गहराई से लेकर युद्ध के मैदान में छिपी बेहद छोटी वस्तुओं तक की पहचान करने में सक्षम है। यह तकनीक केवल तस्वीरें ही नहीं लेती, बल्कि रोशनी के उन तरंगदैर्ध्यों को भी पकड़ती है, जिन्हें मानव आंखें नहीं देख सकतीं। इसी वजह से इसे साधारण इमेजिंग सैटेलाइट की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली निगरानी उपकरण माना जा रहा है।
ISRO अधिकारियों के अनुसार, PS3 स्टेज में आई गड़बड़ी की पूरी जांच के बाद ही मिशन की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
@MUSKAN KUMARI







