₹20,000 करोड़ के गेन बिटकॉइन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय गिरफ्तार

करीब ₹20,000 करोड़ के बहुचर्चित गेन बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को इसकी पुष्टि की।

सीबीआई के मुताबिक आयुष वार्ष्णेय इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं और उनके खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी था। सोमवार को जब वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे, तब मुंबई एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी होने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। इसके बाद मंगलवार को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार डार्विन लैब्स ने वह डिजिटल ढांचा तैयार किया था, जिस पर कथित तौर पर गेन बिटकॉइन घोटाले की पूरी तकनीकी प्रणाली आधारित थी। जांच में डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय, साहिल बघला और निकुंज जैन की भूमिका सामने आई है। निकुंज जैन फिलहाल वाओमी एआई के फाउंडर और चीफ कैपिटल ऑफिसर भी हैं।

सीबीआई का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर एमसीएपी नामक क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़े ERC-20 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को डिजाइन और विकसित किया था, जिसका इस्तेमाल कथित क्रिप्टो पोंजी स्कीम में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि डार्विन लैब्स ने कई अहम डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए थे, जिनमें GBMiners.com नाम का बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म, बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, कॉइन बैंक बिटकॉइन वॉलेट और गेन बिटकॉइन वेबसाइट शामिल हैं। इन्हीं प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों से संपर्क कर निवेश कराया जाता था।

दरअसल, यह घोटाला 2015 में गेन बिटकॉइन नाम से शुरू हुआ था, जिसे कथित तौर पर वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार इस योजना का मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज (अब मृत) और उसका भाई अजय भारद्वाज था। निवेशकों को 18 महीने तक हर महीने 10% तक बिटकॉइन रिटर्न का लालच दिया जाता था और उन्हें बाहरी एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए निवेश करने के लिए कहा जाता था।

सीबीआई के मुताबिक यह पूरी योजना मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) आधारित पोंजी स्कीम थी, जिसमें पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से आने वाले पैसे से किया जाता था। 2017 के बाद नए निवेशकों की संख्या कम होने पर कंपनी ने भुगतान बिटकॉइन के बजाय अपने ही बनाए क्रिप्टो टोकन MCAP में करना शुरू कर दिया, जिसकी कीमत काफी कम थी, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

इस घोटाले के संबंध में जम्मू-कश्मीर से महाराष्ट्र और दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। मामले की व्यापकता और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। अब एजेंसी पूरे नेटवर्क का खुलासा करने और निवेशकों से ठगे गए धन का पता लगाने के लिए जांच को आगे बढ़ा रही है, जिसमें विदेशों में भेजे गए फंड की भी जांच की जा रही है।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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