सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद पहुंचे मुख्यमंत्री आवास, शिष्टाचार या सियासी संकेत पर चर्चा तेज
पटना |
बिहार की राजनीति में सोमवार को एक अनोखा घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधान परिषद सदस्य के रूप में इस्तीफा सीधे उनके आवास से लिया गया। आमतौर पर इस्तीफा सदन में जाकर दिया जाता है, लेकिन इस बार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह स्वयं मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और वहां से इस्तीफा लेकर परिषद पहुंचे।
इस घटनाक्रम को लेकर सियासी गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक पक्ष इसे मुख्यमंत्री के लंबे कार्यकाल और गरिमा के मद्देनजर उठाया गया शिष्टाचारपूर्ण कदम मान रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है।
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि वह सोमवार सुबह शिष्टाचार मुलाकात के लिए मुख्यमंत्री आवास गए थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। साथ ही, खाली हुई सीट पर जल्द चुनाव की घोषणा की जाएगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके जाने से राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अहम योगदान दिया और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया।
गौरतलब है कि इस्तीफे की अंतिम तारीख होने के कारण सुबह से ही इस बात पर नजर थी कि मुख्यमंत्री विधान परिषद जाएंगे या नहीं। हालांकि, वह खुद सदन नहीं पहुंचे। इससे पहले जदयू के नेता और उनके करीबी संजय गांधी ने मीडिया के सामने इस्तीफा पत्र भी दिखाया था।
बाद में सभापति द्वारा स्वयं इस्तीफा लेकर आने की पुष्टि के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया के बाद निर्धारित समयसीमा पूरी हो रही थी और ऐसे में सभापति का मुख्यमंत्री आवास जाना शिष्टाचार के तहत उठाया गया कदम है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
@MUSKAN KUMARI







