संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार हो रहे हंगामे को लेकर स्पीकर ओम बिरला ने सदन में गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, उस दिन लोकसभा में बने हालात बेहद चिंताजनक थे और किसी भी अप्रिय व अप्रत्याशित घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
स्पीकर ने विपक्ष के व्यवहार को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि लोकसभा के इतिहास में पहली बार उन्होंने ऐसा आचरण देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सदस्यों का व्यवहार न केवल सदन के भीतर बल्कि अध्यक्ष के कार्यालय में भी संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ था। इसे उन्होंने संसद की परंपराओं पर काला धब्बा करार दिया।
ओम बिरला ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने एहतियातन प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया। स्पीकर ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इससे एक बड़े अप्रिय घटनाक्रम को टालने में मदद मिली।
गुरुवार को भी हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ, जब लोकसभा में प्रधानमंत्री के संबोधन के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ।
@MUSKAN KUMARI







