राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनरेगा बिल का विरोध किया, सरकार से वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दावा किया कि मनरेगा को निरस्त करने में मोदी सरकार के उद्देश्य वही हैं जो तीन काले कृषि कानूनों को लाने में थे। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों को काम करने का अधिकार देने वाली योजना थी, जिसे केंद्र सरकार अब खत्म करना चाहती है। राहुल ने गरीबों से अपील की कि वे इस नए बिल के विरोध में एकजुट हों।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार का मनरेगा को निरस्त करना महात्मा गांधी के नाम को लोगों की स्मृति से मिटाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी बजट सत्र में इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएगी।

राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में कहा कि नए कानून में केंद्र सरकार काम और पैसा देने का फैसला करेगी और भाजपा शासित राज्यों को हमेशा प्राथमिकता मिलेगी। पहले मजदूरों को सीधे लाभ मिलता था, अब यह ठेकेदारों और अफसरों के हाथ में चले जाएगा। उन्होंने इसे गरीबों के अधिकारों पर हमला करार दिया और कहा कि भाजपा ऐसा भारत चाहती है जहां राजा ही सब कुछ तय करे।

सम्मेलन में देशभर के श्रमिकों ने भाग लिया और अपने कार्यस्थलों से प्रतीकात्मक रूप से मिट्टी लेकर पौधों में डाली। कांग्रेस ने 10 जनवरी से 45 दिनी राष्ट्रव्यापी अभियान “मनरेगा बचाओ संग्राम” की शुरुआत कर दी है, जिसमें मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और अधिकार-आधारित कानून बनाए जाने की मांग की जा रही है।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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