भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारत को चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय निर्यात प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त मिलेगी। संशोधित टैरिफ व्यवस्था में इंडोनेशिया और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम पर 20 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा। वहीं चीन पर अमेरिकी टैरिफ अब भी 34 प्रतिशत तक बना रहेगा।
रॉयटर्स से बातचीत में एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि इस समझौते में “कुछ” कृषि उत्पाद भी शामिल हैं और अमेरिका के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि रूसी तेल खरीद को लेकर भारतीय आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटाया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को बड़ा लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि यह समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया तनाव के बाद नई मजबूती लाएगा, निर्यात को सहारा देगा और बाजार भावना को सकारात्मक बनाएगा।
हालांकि, समझौते को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है और यह जानना जरूरी है कि क्या इस समझौते में भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने संसद में इस पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
@MUSKAN KUMARI







