साइबर फ्रॉड के नाम पर बैंक अकाउंट फ्रीज होने से परेशान आम लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस केवल एक फोन कॉल या सामान्य सूचना के आधार पर किसी का बैंक अकाउंट ब्लॉक नहीं करवा सकती। ऐसा करना कानूनन गलत है और तय प्रक्रिया का पालन न करने पर बैंक के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई हो सकती है।
KHALSA MEDICAL STORE बनाम RBI मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम की जांच में मनी ट्रेल पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी निर्दोष व्यक्ति का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया जाए। कोर्ट के अनुसार, सिर्फ उसी रकम को रोका जा सकता है जो कथित तौर पर फ्रॉड की चेन का हिस्सा हो, न कि पूरे खाते को।
कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि किसी भी बैंक अकाउंट को फ्रीज करने से पहले एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य है। पुलिस को बैंक को एफआईआर की कॉपी के साथ यह भी बताना होगा कि कौन सा लेनदेन फ्रॉड से जुड़ा है। इसके अलावा, 24 घंटे के भीतर संबंधित कोर्ट और मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देना भी जरूरी होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक केवल पुलिस के कहने पर अकाउंट होल्ड नहीं कर सकते। यदि बिना तय प्रक्रिया अपनाए किसी खाते को फ्रीज किया गया, तो संबंधित बैंक और अधिकारियों पर सिविल के साथ-साथ आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है।
कोर्ट के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खाते साइबर क्राइम जांच के दौरान बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्लॉक कर दिए जाते थे। अब अकाउंट फ्रीज करने के लिए केवल कॉल या मौखिक सूचना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा।
@MUSKAN KUMARI







