पश्चिम एशिया पर कांग्रेस में मतभेद, थरूर ने सरकार का बचाव किया

सोनिया गांधी ने चुप्पी को बताया जिम्मेदारी से पलायन, थरूर बोले—यह संतुलित कूटनीति

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जहां सरकार के रुख का बचाव किया है, वहीं कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे जिम्मेदारी से पीछे हटना बताया है।

अपने लेख में थरूर ने कहा कि भले ही यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत के मूल सिद्धांतों—संप्रभुता, अहिंसा और शांतिपूर्ण समाधान—के खिलाफ है, लेकिन विदेश नीति केवल नैतिकता के आधार पर नहीं चल सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना पड़ता है।

थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने कहा कि कई बार सार्वजनिक बयान देने के बजाय मौन रहकर भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

उन्होंने पश्चिम एशिया में भारत के बड़े हितों का हवाला देते हुए बताया कि इस क्षेत्र के साथ लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और करीब 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी है। ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल नैतिक आधार पर बयान देना व्यावहारिक नहीं होगा।

वहीं दूसरी ओर, सोनिया गांधी ने अपने लेख में सरकार की चुप्पी पर कड़ा सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

थरूर ने सोनिया गांधी और अन्य आलोचकों की चिंताओं से आंशिक सहमति जताते हुए कहा कि युद्ध किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की आलोचना करते समय विदेश नीति की जटिलताओं को समझना जरूरी है।

उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा से सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाता आया है। आज के दौर में ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ उसी सोच का आधुनिक रूप है।

थरूर ने निष्कर्ष में कहा कि भारत की चुप्पी युद्ध का समर्थन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनाया गया संयम है, और यही जिम्मेदार कूटनीति की पहचान है।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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