डिजिटल होगी जनगणना 2027: व्यक्तिगत डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय

जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण का दावा—RTI, अदालत या किसी संस्था को नहीं दी जाएगी जानकारी

नई दिल्ली | 

देश में प्रस्तावित जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने स्पष्ट किया है कि इस बार जुटाया जाने वाला व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसे किसी भी परिस्थिति में साझा नहीं किया जाएगा।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत नागरिकों की जानकारी को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाती है। यह डेटा न तो सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध होगा, न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा और न ही किसी अन्य संस्था के साथ साझा किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। इसके तहत नागरिकों को पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा मिलेगी, जिससे वे स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनने की उम्मीद है।

जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का कार्य किया जाएगा, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2026 से विभिन्न राज्यों में की जाएगी। दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जिसमें आयु, लिंग, व्यवसाय, साक्षरता और जाति जैसी जानकारी शामिल होगी।

जनगणना 2027 के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है, जबकि बर्फीले क्षेत्रों—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—के लिए यह तिथि 1 अक्तूबर 2026 तय की गई है।

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। साथ ही, देशभर में 80 हजार से अधिक गणनाकर्मियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मजबूत डिजिटल सिस्टम विकसित किया गया है, ताकि किसी भी तरह की चूक या दुरुपयोग से बचा जा सके।

अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही, डेटा का दुरुपयोग या नागरिकों से आपत्तिजनक प्रश्न पूछना दंडनीय अपराध होगा। ऐसे मामलों में जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

इस बार की जनगणना का एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को, यदि वे अपने संबंध को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें विवाहित श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली और स्व-गणना की सुविधा से जनगणना प्रक्रिया अधिक प्रभावी और आधुनिक बनेगी।

@MUSKAN KUMARI

NCRLOCALDESK
Author: NCRLOCALDESK

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