टी20 विश्व कप 2026 से पहले क्रिकेट के मैदान के बाहर हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश के भारत में खेलने से इनकार के बाद ICC द्वारा उसे टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के फैसले ने पहले ही हलचल मचा दी थी। अब पाकिस्तान ने भी भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट से नाम वापस लेने की चेतावनी दी है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार से बातचीत के बाद 2 फरवरी तक फैसला सुना सकते हैं।
हालांकि, यह साफ है कि पाकिस्तान का इस मामले से सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि उसके सभी मुकाबले हाइब्रिड मॉडल के तहत श्रीलंका में प्रस्तावित हैं। इसके बावजूद PCB द्वारा दी जा रही बहिष्कार की धमकी को क्रिकेट जगत में “दबाव की राजनीति” के तौर पर देखा जा रहा है।
ICC के रेवेन्यू मॉडल पर नजर डालें तो तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है। ICC एक इवेंट-बेस्ड बिजनेस मॉडल पर काम करता है। वर्ष 2024 में ICC का कुल राजस्व 777.9 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें से 728.5 मिलियन डॉलर सिर्फ इवेंट्स से आए। वहीं 2024–27 रेवेन्यू साइकिल में भारत को 38.5 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जबकि पाकिस्तान का हिस्सा केवल 5.75 प्रतिशत है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ICC के कुल राजस्व का करीब 80 प्रतिशत भारत से आता है।
पाकिस्तान का असली प्रभाव भारत-पाकिस्तान जैसे हाई-व्यूअरशिप मुकाबलों तक सीमित है। प्रतिस्पर्धात्मकता और रोमांच जरूर घटता है, लेकिन आर्थिक रूप से ICC पर इसका निर्णायक असर नहीं पड़ता। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि PCB की यह रणनीति ज्यादा दिन टिकाऊ नहीं है और उल्टा असर पाकिस्तान पर ही पड़ सकता है।
@MUSKAN KUMARI







