नई दिल्ली।
भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। इस अवसर पर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। इसी क्रम में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस परेड 2026 के मुख्य अतिथि के रूप में भारत पहुंचे हैं। उनके साथ यूरोप के दर्जनभर वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार, गणतंत्र दिवस परेड के तुरंत बाद भारत और यूरोपीय संघ के अधिकारी एफटीए पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे दोनों पक्षों के व्यापारिक, रणनीतिक और वैश्विक सहयोग को नई गति मिलेगी। यह समझौता भारत-ईयू संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।
कौन हैं उर्सुला वॉन डेर लेयन?
उर्सुला वॉन डेर लेयन वर्तमान में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं और 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ की सामूहिक आवाज के रूप में वैश्विक मंच पर नेतृत्व कर रही हैं। वर्ष 2019 में वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं और 2024 में लगातार दूसरी बार इस जिम्मेदारी के लिए चुनी गईं। उन्हें जर्मनी के सत्तारूढ़ दल क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) ने नामित किया था।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:
उर्सुला वॉन डेर लेयन का जन्म 8 अक्टूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ। उनके पिता अर्न्स्ट आलरेक यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और बाद में जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के प्रमुख रहे। उनकी मां हाइडी-एडेल आलरेक शिक्षाविद् थीं। बचपन से ही उन्हें कूटनीति, राजनीति और शिक्षा का समृद्ध माहौल मिला।
उन्होंने यूरोपियन स्कूल, गोटिंगेन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को चुना और जर्मनी के हैनोवर मेडिकल स्कूल से डॉक्टर बनीं। अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने अध्ययन किया।
राजनीतिक सफर और पहचान:
40 की उम्र के बाद राजनीति में प्रवेश करने वाली उर्सुला वॉन डेर लेयन जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली कैबिनेट मंत्री रहीं। उन्होंने सामाजिक मामलों, परिवार कल्याण और रक्षा मंत्री जैसे अहम मंत्रालय संभाले। रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने सेना में आधुनिकीकरण और लैंगिक समानता पर जोर दिया, हालांकि इस दौरान कुछ अनुबंधों को लेकर विवाद भी सामने आए।
2019 में वे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष बनीं और तभी से उन्हें यूरोप की ‘आयरन लेडी’ के रूप में देखा जाने लगा। उनके नेतृत्व में यूरोपीय संघ ने वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में एकजुट भूमिका निभाई है।
गणतंत्र दिवस 2026 पर उनकी मौजूदगी और संभावित भारत-ईयू एफटीए यह संकेत देता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
@MUSKAN KUMARI







