कैश कांड में जस्टिस वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जांच कमेटी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही संसदीय कमेटी की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति में कोई कानूनी खामी नहीं है।

जस्टिस वर्मा की याचिका पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनवाई की। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) का गठन केवल उसी स्थिति में होता है, जब एक ही दिन दोनों सदनों में पेश किए गए प्रस्तावों को दोनों सदनों द्वारा स्वीकार किया जाए। राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन द्वारा प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद लोकसभा स्पीकर द्वारा कमेटी गठित करना पूरी तरह वैध है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिप्टी चेयरमैन को प्रस्ताव अस्वीकार करने का अधिकार है और चूंकि उनके आदेश को चुनौती नहीं दी गई है, इसलिए स्पीकर की कार्रवाई पर कोई सवाल नहीं उठता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज को पद से हटाने का फैसला संसद के दोनों सदनों की सहमति से ही हो सकता है।

गौरतलब है कि मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर आग लगने के दौरान उनके गैराज से बड़ी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए थे। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर न्यायिक कार्यों से अलग कर दिया गया था। मामले के तूल पकड़ने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को एक जांच समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार कर रहे हैं। जांच समिति के समक्ष जस्टिस वर्मा को 24 जनवरी को पेश होना है।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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