बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में जारी अंतर्कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और कांग्रेस एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया है कि उनके पिता पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे, वहीं कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने इसके उलट बड़ा बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इकबाल हुसैन ने दावा किया कि पार्टी के 80 से 90 विधायकों ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने के समर्थन में हाईकमान को अपना पक्ष सौंपा है। उन्होंने कहा कि यह मामला अब शीर्ष नेतृत्व के पास है और कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है, जहां फैसले शालीनता और मर्यादा के साथ होने चाहिए। हुसैन ने यतींद्र सिद्धारमैया के बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह बार-बार अपने पिता के पक्ष में बयान देना पार्टी और आलाकमान—दोनों को असहज करता है।
इकबाल हुसैन ने साफ कहा कि पार्टी के भीतर कई नेताओं की यही इच्छा है कि डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया जाए, लेकिन बयानबाजी से भ्रम पैदा होता है, इसलिए अधिकांश नेता चुप्पी साधे हुए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस एमएलसी चन्नाराज हट्टीहोली ने भी सार्वजनिक रूप से डीके शिवकुमार को जल्द मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा जताई है।
इस बीच, डीके शिवकुमार दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे एआईसीसी की बैठक में आगामी राज्य चुनावों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाए गए हैं। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि इस तरह के बयानों से पार्टी को नुकसान होता है और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही सभी को इस विषय पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की हिदायत दे चुके हैं।
दिल्ली रवाना होने से पहले बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि पार्टी के भीतर किसी तरह का भ्रम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, वे खुद और पार्टी नेतृत्व—तीनों के बीच बातचीत साफ और पारदर्शी रही है। शिवकुमार ने कहा कि जो भी समझ बनी है, उसी के अनुसार सरकार और संगठन काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही है और सभी की निगाहें अब दिल्ली में होने वाली हाईकमान की बैठकों और फैसलों पर टिकी हैं।
@MUSKAN KUMARI







