घरेलू गैस की उपलब्धता बनाए रखने और एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना और संभावित गैस संकट को टालना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ESMA लागू होने के बाद अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को एलपीजी और अन्य ईंधन की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में वृद्धि देखी गई थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सरकार ने तेल रिफाइनरियों को भी एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए लिया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल एलपीजी खपत 3.13 करोड़ टन रही, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन देश में हुआ, जबकि बाकी गैस का आयात करना पड़ा।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और अन्य देशों से आयात करता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर गैस और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच देश के कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरें सामने आई हैं। चेन्नई, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर इसका असर दिखने लगा है और कई जगहों पर कामकाज प्रभावित होने की खबर है।
@MUSKAN KUMARI







