स्थान: पटना, बिहार
तारीख: जुलाई 2025
रिपोर्ट: एशियन टाइम्स ब्यूरो
नई दिल्ली/पटना:
भारत की ऊर्जा जरूरतों को हरित और सतत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) ने अब बिहार में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स लगाने की योजना बनाई है। इस उद्देश्य से एनटीपीसी की सहायक कंपनी ने बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) के साथ एक अहम समझौता किया है।
- यह समझौता पटना में हुआ, जहां दोनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में आधिकारिक तौर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
- इसका उद्देश्य राज्य में हरित ऊर्जा स्रोतों का विकास करना है।
- साझेदारी के तहत बिजली भंडारण (Battery Storage) की आधुनिक तकनीक और सौर/पवन ऊर्जा परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।
कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद:
यह परियोजना भारत सरकार के Net Zero Carbon Emission मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। इस समझौते से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि बिहार की बिजली व्यवस्था भी मजबूत होगी।
क्या होगा फायदा?
कंपनियों की प्रतिक्रिया:
एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“बिहार जैसे ऊर्जा-गहन राज्य में इस तरह की परियोजना से न केवल राज्य को बल्कि पूरे पूर्वी भारत को फायदा मिलेगा।”
बीएसपीजीसीएल के एक प्रतिनिधि ने बताया:
“हमें गर्व है कि हम हरित ऊर्जा क्षेत्र में इतना बड़ा कदम उठा रहे हैं। यह साझेदारी हमारे ऊर्जा ढांचे को आधुनिक बनाएगी।”
क्या है BESS?
Battery Energy Storage System (BESS) एक ऐसी तकनीक है जिसमें सौर या पवन जैसे रिन्यूएबल स्रोतों से उत्पादित बिजली को स्टोर किया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसे उपयोग किया जा सके। इससे बिजली की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है, भले ही सूरज न निकले या हवा न चले।
आगे की योजना:
- 2025 के अंत तक पहले BESS प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन शुरू होने की संभावना है।
- राज्य में 500 मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल क्षमता जोड़ने का लक्ष्य।
- भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसमें शामिल करने की योजना।
यह साझेदारी ना सिर्फ बिहार की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि देश के हरित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह उदाहरण बनेगा कि कैसे सरकारी और सार्वजनिक उपक्रम मिलकर जलवायु संकट से लड़ सकते हैं।

Author: Bihar Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)