भारत के कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी पक्ष, खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अपनी दलीलें एनसीएलएटी के समक्ष रखें। साथ ही अदालत ने एनसीएलएटी को इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस विवाद पर अंतिम सुनवाई 10 अप्रैल से शुरू होगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, वेदांता लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एनसीएलएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
इससे पहले 24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से मना कर दिया था, जिसके बाद 25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। वहीं, एनसीएलएटी ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के कर्जदाताओं की समिति (CoC) से भी जवाब तलब किया था।
अधिग्रहण की प्रक्रिया
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड वर्तमान में दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है और इसके अधिग्रहण के लिए कई कंपनियां दौड़ में थीं। नवंबर में कर्जदाताओं की समिति ने अदाणी एंटरप्राइजेज की रेजोल्यूशन योजना को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से भी हरी झंडी मिल गई।
हालांकि, वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर की हैं। इनमें रेजोल्यूशन प्लान की वैधता और CoC व एनसीएलटी द्वारा दी गई मंजूरी पर सवाल उठाए गए हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया है कि अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम निर्णय एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा। इस मामले में सभी पक्षों की नजर अब 10 अप्रैल से शुरू होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी है।
@MUSKAN KUMARI






