अजमेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद सियासत तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच X पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री पर “राजनीतिक हताशा” में बयान देने का आरोप लगाया।
गहलोत ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस पर देश को बांटने का आरोप लगाना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि नैतिक दिवालियापन का प्रतीक भी है। उन्होंने लिखा, “आपका विरोध करना, देश का विरोध करना नहीं है। स्वयं को राष्ट्र से बड़ा समझने की भूल न करें।”
सरकारी मंच के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
गहलोत ने कहा कि जनता को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री उनके पत्र में उठाए गए जनहित के मुद्दों पर जवाब देंगे, लेकिन भाषण का उपयोग संकीर्ण राजनीति के लिए किया गया।
‘राइट टू हेल्थ’ और श्रमिक योजनाओं पर केंद्र से सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान की पिछली सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्या पूरे देश में ‘राइट टू हेल्थ’ लागू करने की कोई योजना है। उन्होंने ‘गीग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट’ और ‘शहरी रोजगार गारंटी योजना’ को क्रांतिकारी बताते हुए कहा कि इन पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और विस्तार होना चाहिए था।
गहलोत का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने इन मुद्दों पर कोई ठोस संकेत नहीं दिया, जबकि राजस्थान मॉडल को पूरे देश के सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया जा सकता था।
@MUSKAN KUMARI






