लखनऊ | एशियन टाइम्स ब्यूरो
राजधानी लखनऊ में 13 वर्षीय छात्र की गोली लगने से मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए आरोपी किशोर को बाल सुधार गृह भेज दिया है। आरोपी पूर्व बसपा MLC के भतीजे बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में किशोर ने दावा किया है कि वह अपने पिता की रिवॉल्वर चेक कर रहा था, तभी गलती से गोली चल गई और उसके दोस्त के माथे में लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला
यह घटना सरोजनीनगर थाना क्षेत्र के बेहसा गांव की है। यहां रहने वाले जमीर खान इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं। उनका बेटा उनैज (13) लखनऊ के स्टेला मैरी स्कूल में कक्षा 7 का छात्र था।
परिवार के अनुसार सोमवार को कृष्णानगर इलाके के बालाजी कॉम्प्लेक्स में रहने वाले व्यवसायी संजीव त्रिपाठी के घर जन्मदिन की पार्टी थी। संजीव त्रिपाठी का बेटा अपने दोस्त के साथ उनैज को पार्टी में बुलाने उनके घर आया था।
जमीर खान का कहना है कि उन्होंने बेटे को भेजने से मना कर दिया था, लेकिन दोस्तों ने जोर देकर उसे अपने साथ ले लिया। दोस्ती के कारण उनैज उनके साथ चला गया।
अचानक आया अस्पताल से फोन
जमीर खान के मुताबिक,
सोमवार शाम करीब 7:30 बजे आरोपी के पिता संजीव त्रिपाठी ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल किया। उस समय फोन उनके बड़े बेटे उसैद ने उठाया।
फोन पर कहा गया कि
“तुम्हारा भाई लोकबंधु अस्पताल में है, तुरंत आ जाओ।”
परिवार जब लोकबंधु अस्पताल पहुंचा तो उन्हें कुछ देर तक बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। बाद में पुलिस ने उन्हें बताया कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है।
आरोपी का दावा – गलती से चली गोली
एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा के अनुसार पूछताछ में आरोपी किशोर ने बताया कि वह अपने पिता की रिवॉल्वर चेक कर रहा था। उसी दौरान अचानक गोली चल गई और सामने खड़े उसके दोस्त उनैज के माथे में लग गई।
पुलिस को CCTV फुटेज भी मिला है, जिसमें घटना से पहले आरोपी किशोर अकेले कार से रिवॉल्वर लेकर जाता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि यह वाकई हादसा था या किसी लापरवाही का नतीजा।
परिवार ने लगाया हत्या छिपाने का आरोप
मृतक के पिता जमीर खान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि
“मेरे बेटे की मौत को हादसा बताकर छिपाने की कोशिश की जा रही है। रोजे के दिन मेरे बेटे को मार दिया गया।”
उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
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नाबालिग बच्चों के हाथ में लाइसेंसी हथियार कैसे पहुंचे?
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क्या परिवारों में हथियारों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही हो रही है?
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बच्चों के बीच बढ़ती हथियार संस्कृति क्या समाज के लिए खतरा बनती जा रही है?
लखनऊ की यह दर्दनाक घटना न केवल एक परिवार को उजाड़ गई, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि हथियारों की जरा सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






